SC on Reservation: Supreme Court of India ने सरकारी नौकरी में क्रीमी लेयर के उम्मीदवारों को आरक्षण मिलने पर गंभीर चिंता जताई है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सवाल किया कि अगर माता-पिता दोनों IAS अधिकारी हैं, तो उनके बच्चों को आरक्षण का लाभ क्यों मिलना चाहिए।
‘आरक्षण का चक्र खत्म नहीं होगा’
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने कहा कि शिक्षा और आर्थिक सशक्तीकरण के साथ सामाजिक स्थिति भी मजबूत होती है। ऐसे में संपन्न परिवारों के बच्चों को लगातार आरक्षण देना सामाजिक न्याय के मूल उद्देश्य के खिलाफ हो सकता है। कोर्ट ने कहा कि अगर पहले से सशक्त लोग भी आरक्षण लेते रहेंगे, तो समाज कभी इस चक्र से बाहर नहीं निकल पाएगा।
SC on Reservation: कर्नाटक के कुरुबा समुदाय से जुड़ा मामला
मामला कर्नाटक के ‘कुरुबा’ समुदाय के एक उम्मीदवार से जुड़ा है, जिसे राज्य की पिछड़ा वर्ग सूची में श्रेणी II(A) में रखा गया है। उम्मीदवार का चयन Karnataka Power Transmission Corporation Limited में सहायक इंजीनियर पद पर आरक्षित कोटे के तहत हुआ था। हालांकि जिला जाति और आय सत्यापन समिति ने उसे जाति वैधता प्रमाण पत्र देने से इनकार कर दिया। समिति का कहना था कि उम्मीदवार का परिवार ‘क्रीमी लेयर’ में आता है।
परिवार की आय 19 लाख से ज्यादा
जांच में पाया गया कि उम्मीदवार के माता-पिता दोनों सरकारी कर्मचारी हैं और परिवार की सालाना आय करीब 19.48 लाख रुपए है। जबकि OBC क्रीमी लेयर के लिए मौजूदा आय सीमा 8 लाख रुपए तय है।
कोर्ट बोला- आरक्षण में संतुलन जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सामाजिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए आरक्षण जरूरी है, लेकिन इसमें संतुलन भी होना चाहिए।
कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा:
- जिन परिवारों ने आर्थिक और सामाजिक तरक्की कर ली है, उन्हें लगातार आरक्षण का फायदा मिल रहा है।
- उच्च शिक्षा और आर्थिक मजबूती से सामाजिक स्थिति भी बदलती है।
- आरक्षण का लाभ वास्तव में जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना चाहिए।
SC on Reservation: याचिकाकर्ता ने क्या दलील दी
उम्मीदवार की ओर से वकील शशांक रत्नू ने दलील दी कि सरकारी कर्मचारियों की सैलरी को क्रीमी लेयर तय करने का एकमात्र आधार नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर केवल वेतन के आधार पर फैसला होगा, तो ड्राइवर, क्लर्क और चपरासी जैसे निम्न स्तर के कर्मचारियों के बच्चों को भी आरक्षण से बाहर किया जा सकता है।
SC on Reservation: हाईकोर्ट में बदला था फैसला
इससे पहले कर्नाटक हाईकोर्ट के सिंगल जज ने उम्मीदवार के पक्ष में फैसला देते हुए कहा था कि माता-पिता की सैलरी को आय में नहीं जोड़ा जाना चाहिए। लेकिन बाद में डिवीजन बेंच ने यह फैसला पलट दिया और कहा कि केंद्र सरकार का 1993 वाला आदेश सिर्फ केंद्र सरकार की नौकरियों पर लागू होता है, राज्य सरकार की आरक्षण व्यवस्था पर नहीं।
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