Bhubaneswar: ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में राज्य के पहले स्काईवॉक प्रोजेक्ट के शिलान्यास के साथ ही राजनीतिक विवाद भी गहरा गया है। रसुलगढ़ से पलाशुणी के बीच बनने वाले इस आधुनिक स्काईवॉक और तीन फुट ओवरब्रिज परियोजना को शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। करीब 18.42 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना का शिलान्यास भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से आयोजित कार्यक्रम में किया गया। हालांकि विकास परियोजना के शुभारंभ के साथ ही कार्यक्रम के आयोजन और मंच पर नेताओं को दी गई प्राथमिकता को लेकर विपक्ष और भाजपा के भीतर सवाल उठने लगे हैं।
18.42 करोड़ की लागत से बनेगा आधुनिक स्काईवॉक
भुवनेश्वर में रसुलगढ़ से पलाशुणी के बीच बनने वाला स्काईवॉक राज्य का पहला ऐसा आधुनिक ढांचा होगा, जिसका उद्देश्य पैदल यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना और यातायात को अधिक सुगम बनाना है। इस परियोजना के तहत स्काईवॉक के साथ तीन फुट ओवरब्रिज का भी निर्माण किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी और व्यस्त मार्गों पर ट्रैफिक प्रबंधन बेहतर होगा।
Bhubaneswar: विपक्ष ने सरकारी कार्यक्रम पर उठाए सवाल
परियोजना के शिलान्यास समारोह को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार और भाजपा पर निशाना साधा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकारी कार्यक्रम को भाजपा के राजनीतिक मंच में बदल दिया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया और स्थानीय निर्वाचित विधायकों को कार्यक्रम में उचित सम्मान और महत्व नहीं मिला। विपक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि संवैधानिक पद पर नहीं होने वाले कुछ लोगों को मंच पर प्रमुखता क्यों दी गई।
बीजेपी की अंदरूनी खींचतान भी आई सामने
स्काईवॉक परियोजना के बहाने भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी भी खुलकर सामने आती दिखाई दी। पार्टी के भीतर सांसद अपराजिता सारंगी की भूमिका को लेकर असंतोष की चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि वरिष्ठ भाजपा नेता जगन्नाथ प्रधान को कार्यक्रम में अपेक्षित महत्व नहीं दिया गया, जिससे पार्टी के एक वर्ग में नाराजगी बढ़ी है।
Bhubaneswar: नए चेहरों को तरजीह मिलने से पुराने कार्यकर्ता नाराज
बताया जा रहा है कि हाल ही में बीजू जनता दल छोड़कर भाजपा में शामिल हुए रुद्र नारायण सामंतराय को सरकारी मंच पर प्रमुखता दी गई। इसे लेकर पार्टी के पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं में असंतोष देखा जा रहा है। वर्षों से संगठन के लिए काम कर रहे नेताओं की अनदेखी और नए नेताओं को प्राथमिकता मिलने से भाजपा के भीतर बदलते राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा तेज हो गई है। अब देखना होगा कि विकास परियोजना से जुड़ा यह विवाद आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति पर क्या असर डालता है।
ये भी पढ़ें…PM मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा से पहले बड़ा ऐलान, 57% निर्यात होगा पहले दिन से टैरिफ मुक्त








