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नरोत्तम मिश्रा का टिकट क्यों कटा? भाजपा के फैसले के पीछे सामने आए बड़े कारण

 Datia By-Election:

Datia By-Election: मध्यप्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा ने अंतिम समय में बड़ा फैसला लेते हुए पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर पूर्व संभागीय संगठन मंत्री आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया। जबकि पिछले करीब चार महीनों से नरोत्तम मिश्रा चुनाव की तैयारी में जुटे थे। प्रदेश भाजपा ने उनका नाम केंद्रीय नेतृत्व को भेजा था, लेकिन दिल्ली से मिले फीडबैक और चुनावी रणनीति के आधार पर उम्मीदवार बदलने का फैसला लिया गया।

Datia By-Election: CM से मुलाकात के बाद गया था नरोत्तम का नाम-

सूत्रों के मुताबिक, 6 जुलाई को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद प्रदेश भाजपा ने दतिया सीट के लिए केंद्रीय नेतृत्व को डॉ. नरोत्तम मिश्रा का सिंगल नाम भेजा था। हालांकि, दिल्ली में कराए गए फीडबैक में उनकी स्थिति उम्मीद के मुताबिक मजबूत नहीं पाई गई। इसके बाद पार्टी ने जीत की संभावना को देखते हुए आशुतोष तिवारी के नाम पर अंतिम मुहर लगा दी।

Datia By-Election: आंतरिक रिपोर्ट और चुनावी गणित बना वजह-

सूत्रों के अनुसार, नरोत्तम मिश्रा के बेटे सुकर्ण मिश्रा को लेकर भी आंतरिक रिपोर्ट मंगाई गई थी। रिपोर्ट में स्थानीय माहौल पूरी तरह अनुकूल नहीं बताया गया। पार्टी नेतृत्व ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद उम्मीदवार बदलने का फैसला किया।

Datia By-Election: ‘नया पावर सेंटर’ बनने की आशंका भी चर्चा में-

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि नरोत्तम मिश्रा उपचुनाव जीतते, तो उनके दोबारा मंत्री बनने और महत्वपूर्ण विभाग मिलने की संभावना बढ़ जाती। इससे प्रदेश सरकार और संगठन में एक नया शक्ति केंद्र उभर सकता था। माना जा रहा है कि इस पहलू को भी टिकट बदलने के फैसले में अहम माना गया।

दिग्गज नेताओं के बीच संतुलन साधने की कोशिश-

मध्यप्रदेश भाजपा में पहले से कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल, नरेंद्र सिंह तोमर, शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया और वीडी शर्मा जैसे प्रभावशाली नेता सक्रिय हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व किसी नए शक्ति केंद्र के उभरने से बचना चाहता था। इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए आशुतोष तिवारी को मौका दिए जाने की चर्चा है।

ब्राह्मण वोट बैंक पर भाजपा का फोकस-

भाजपा ने नरोत्तम मिश्रा की जगह भी ब्राह्मण चेहरे पर ही भरोसा जताया। दतिया विधानसभा क्षेत्र में 30 हजार से अधिक ब्राह्मण और लगभग इतनी ही संख्या में जाटव मतदाता हैं। पार्टी का मानना है कि संघ की पृष्ठभूमि वाले स्थानीय नेता आशुतोष तिवारी ब्राह्मण वोट बैंक को मजबूत कर सकते हैं।

नरोत्तम समर्थकों की नाराजगी बनी चुनौती-

उम्मीदवार बदलने के बाद भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती नरोत्तम मिश्रा और उनके समर्थकों की नाराजगी दूर करना है। दतिया भाजपा के जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाह समेत कई पदाधिकारियों ने असंतोष जताया है। दतिया, डबरा और ग्वालियर तक विरोध के स्वर सुनाई दिए हैं। बूथ स्तर तक नरोत्तम समर्थकों का मजबूत नेटवर्क होने के कारण संगठन के लिए सभी को साथ लेकर चुनाव लड़ना आसान नहीं होगा।

आशुतोष तिवारी बोले- आशीर्वाद चाहिए-

उम्मीदवार घोषित होने के बाद आशुतोष तिवारी ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा को अपना अभिभावक बताया। उन्होंने कहा कि उनका आशीर्वाद हमेशा उनके साथ रहेगा। भाजपा कार्यालय से निकलते समय उन्होंने मौजूद नेताओं से कहा, “बड़ा मन करके आशीर्वाद दीजिए।”

CM और प्रदेश अध्यक्ष की प्रतिष्ठा का सवाल-

यह उपचुनाव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, दोनों के लिए प्रतिष्ठा का चुनाव माना जा रहा है उम्मीदवार बदलने के बाद अब पूरी चुनावी रणनीति नए सिरे से तैयार की जाएगी। ऐसे में आशुतोष तिवारी की जीत सरकार और संगठन, दोनों के लिए अहम मानी जा रही है।

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