Ladakh Hill Council: लद्दाख के स्वशासन को और मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने कुछ बड़े बदलाव करने का तय किया है। लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने कहा कि प्रदेश में नवगठित 17 तहसीलों में जल्द तहसीलदारों की तैनाती की जाएगी। इसके साथ ही प्रदेश के सभी सात जिलों को लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद अधिनियम के लाभ मिलेंगे।
आशीष कुंद्रा ने क्या कहा?
आशीष कुंद्रा ने कहा कि लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल एक्ट की धारा 3(1) में पहले से ही हर जिले में एक काउंसिल का प्रावधान है और कानून में सिर्फ मामूली बदलाव की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि उनके पास LAHDC एक्ट के तहत मिलने वाली शक्तियां होंगी। उन्होंने इस फैसले को लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की दिशा में एक अहम कदम बताया।
लद्दाख की भौगोलिक स्थिति (पहाड़ और कठिन रास्ते) को देखते हुए यहां के विकास के कामों में आम जनता की भागीदारी जरूरी थी। इस परिषद के बनने से आम लोगों को क्षेत्र के विकास और प्लानिंग में अपनी बात रखने का मौका मिला।
क्या-क्या हैं लोगों के लिए लाभदायक?
- स्थानीय लोगों को अपनी प्राथमिकताओं के मुताबिक नीतियां बनाने, योजनाएं लागू करने और निर्णय लेने का अधिकार मिलता है।
- दुर्गम रास्तों का विकास, पानी-बिजली जैसी मूल सुविधाओं को लोगों तक पहुंचाना।
- स्थानीय लोगों को उनके अनुसार रोजगार और स्वरोजगार उपलब्ध कराना।
- पर्वतीय क्षेत्रों को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाना, ताकि लोगों को कठिनाई से छुटकारा मिले।
- क्षेत्र के विकास के लिए स्थानीय लोगों की भागीदारी आवश्यक होगी।
LAHDC का बढ़ेगा दायरा
LAHDC यूं तो सिर्फ दो जिलों तक सीमित था, लेकिन अब इसका दायरा बढ़कर सात जिलों तक हो गया है। पिछले साल लद्दाख में पांच और जिले बनाए गए थे। इनमें शाम, नुब्रा, चांगथांग, जांस्कर और द्रास शामिल हैं।
Written by- Anushka
यह भी पढे़…नहाने के बाद की ये 5 छोटी गलतियां दे रही हैं फंगल इंफेक्शन को न्योता








