Asthma Treatment: ब्रोंकियल अस्थमा यानी दमा एक ऐसी बीमारी है जिसमें मरीज को सांस लेने में परेशानी होती है। इस समस्या में सीने में जकड़न महसूस होती है, लगातार खांसी आ सकती है और सांस लेते समय घरघराहट जैसी आवाज भी सुनाई दे सकती है। कई बार ऐसा लगता है जैसे सांस रुक रही है या अटक रही है। मौसम बदलने, ठंडी हवा लगने, धूल-मिट्टी, परागकण या किसी खास चीज से एलर्जी होने पर दमा के लक्षण ज्यादा बढ़ सकते हैं।
आयुर्वेद से अस्थमा नियंत्रण संभव उपाय
आयुर्वेद के अनुसार, अस्थमा मुख्य रूप से शरीर के कफ और वात दोष के असंतुलन के कारण होता है। जब ये दोनों दोष बिगड़ते हैं, तो श्वास नलिकाओं में सूजन हो सकती है और बलगम ज्यादा बनने लगता है। अच्छी बात यह है कि सही दिनचर्या, संतुलित खान-पान और कुछ आसान आयुर्वेदिक उपाय अपनाकर अस्थमा को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

दमा में खान-पान का विशेष ध्यान रखें
दमा के मरीजों को अपने खाने-पीने पर खास ध्यान देना चाहिए। रात में हल्का और गर्म खाना खाना बेहतर माना जाता है। ठंडी, बासी और ज्यादा भारी चीजों से बचना चाहिए। दही, केला, ज्यादा तली हुई चीजें, बहुत खट्टी चीजें और ठंडे पेय पदार्थ कफ बढ़ा सकते हैं, इसलिए इन्हें सीमित मात्रा में ही लें। इसके बजाय गर्म सूप, अदरक वाला पानी, हल्दी वाला दूध और गुनगुना पानी ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में गुनगुना पानी पीने से श्वास नलिकाओं की सफाई में मदद मिलती है।
आयुर्वेदिक नुस्खों से दमा में राहत
कुछ घरेलू आयुर्वेदिक नुस्खे भी दमा में राहत दे सकते हैं। बहेड़ा का चूर्ण लगभग 3 से 5 ग्राम मात्रा में लेकर उसे बराबर मात्रा में शहद के साथ दिन में दो बार लिया जा सकता है। इसी तरह कंटकारी की जड़ का चूर्ण भी शहद के साथ या काढ़े के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। माना जाता है कि ये दोनों जड़ी-बूटियां कफ कम करने और सांस की नली को साफ रखने में मदद करती हैं। छाती और पीठ पर गुनगुना सरसों का तेल लगाना भी लाभदायक हो सकता है। अगर इस तेल में एक चुटकी सेंधा नमक मिला लिया जाए और हल्के हाथ से मालिश की जाए, तो सीने की जकड़न में आराम मिल सकता है। इसके अलावा भाप लेना और गुनगुने पानी से गरारे करना भी सांस की परेशानी कम करने में सहायक माना जाता है।
दमा मरीज धूम्रपान और धूल से बचें
दमा के मरीजों को धूम्रपान से पूरी तरह दूरी बनानी चाहिए। चाहे खुद धूम्रपान करें या किसी और के धुएं के संपर्क में आएं, दोनों ही स्थिति में नुकसान हो सकता है। धूल, मिट्टी और एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थों से बचना जरूरी है। घर को साफ और हवादार रखना चाहिए ताकि सांस लेने में दिक्कत कम हो। मानसिक तनाव भी अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकता है, इसलिए मन को शांत रखने की कोशिश करनी चाहिए।
साथ ही, दमा के मरीजों को नियमित रूप से डॉक्टर से जांच करवाते रहना चाहिए। अगर अचानक सांस लेने में बहुत ज्यादा परेशानी होने लगे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। आयुर्वेदिक उपाय सहायक हो सकते हैं, लेकिन इन्हें अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित रहता है।
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