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ग्रेजुएशन पर टोपी हवा में क्यों उछालते हैं स्टूडेंट्स? 114 साल पुरानी है इस परंपरा की कहानी

ग्रेजुएशन कैप का इतिहास जानिए

Graduation Cap History: डिग्री हाथ में आते ही स्टूडेंट्स सबसे पहला काम जो करते हैं, वह है सिर की चौकोर टोपी को हवा में उछालना। कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज के दीक्षांत समारोह में यह नजारा इतना आम हो गया है कि लगता है, यह हमेशा से होता आया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस रिवाज की शुरुआत 114 साल पहले हुई थी और इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी छिपी है।

यूरोप से शुरू हुई गाउन और कैप की परंपरा

दीक्षांत समारोह में गाउन, हुड और कैप पहनने की परंपरा आज भले ही जश्न का हिस्सा लगे, लेकिन इसकी जड़ें 12वीं-13वीं शताब्दी के यूरोप से जुड़ी हैं। उस वक्त बोलोग्ना, पेरिस और ऑक्सफोर्ड जैसे विश्वविद्यालय बन रहे थे। उन दिनों यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग्स बहुत ठंडी होती थीं और कमरों को गर्म करने की कोई व्यवस्था नहीं थी। खुद को गर्म रखने के लिए छात्र और प्रोफेसर पढ़ाई के दौरान लंबी पोशाकें पहनते थे, जो गले, सिर और पैरों तक को ढकती थीं।

उस समय कई विद्वान पादरियों से भी जुड़े थे, इसलिए उनके कपड़े चर्च के अधिकारियों वाले गाउन जैसे दिखते थे। धीरे-धीरे यह व्यावहारिक कपड़ा शिक्षा का प्रतीक बन गया। बाद में यूरोप के विश्वविद्यालयों ने इसे अनिवार्य कर दिया। गाउन के साथ गले में लटकने वाला ‘हुड’ सबसे खास माना गया। हुड के रंग और डिजाइन से पता चलता था कि छात्र किस विषय से है और उसकी डिग्री बैचलर्स, मास्टर्स या पीएचडी है।

जब यूरोपीय देशों ने एशिया, अफ्रीका और अमेरिका में अपना एजुकेशन सिस्टम फैलाया, तो यह ड्रेस भी वहां पहुंच गई। आज गर्मी से बचाव के लिए नहीं, बल्कि परंपरा निभाने के लिए इसे पहना जाता है।

टोपी के ऊपर लटकन का क्या मतलब होता है?

टोपी के ऊपर लटकन यानी टैसल का भी अपना मतलब है। समारोह की शुरुआत में लटकन एक तरफ रखी जाती है और डिग्री मिलने के बाद उसे दूसरी तरफ घुमा दिया जाता है। यह इस बात का संकेत है कि अब पढ़ाई पूरी हो गई है। सिर पर पहनी जाने वाली चौकोर कैप को ‘मोर्टारबोर्ड’ कहा जाता है, क्योंकि इसका आकार राजमिस्त्री के गारा रखने वाले बोर्ड जैसा होता है। कुछ इतिहासकार मानते हैं कि इसका डिजाइन पुनर्जागरण काल में पादरियों की ‘बिरेटा’ टोपी से प्रेरित है।

टोपी हवा में क्यों उछाली जाती है?

अब आते हैं सबसे बड़े सवाल पर – टोपी हवा में क्यों उछाली जाती है? इसके पीछे एक आधुनिक कहानी है। माना जाता है कि इसकी शुरुआत 1912 में अमेरिका की नेवल एकेडमी से हुई। उस साल जब कैडेट्स पास आउट हुए, तो उन्हें नई टोपियां मिलीं। पुरानी टोपियों की अब जरूरत नहीं थी, इसलिए खुशी में छात्रों ने उन्हें हवा में उछाल दिया। वहीं से यह ट्रेंड शुरू हुआ और धीरे-धीरे अमेरिका के हर कॉलेज से होता हुआ दुनिया भर में पहुंच गया।

आज यह सिर्फ जश्न नहीं, बल्कि सफलता का वैश्विक प्रतीक बन चुका है। हालांकि, कुछ संस्थान टोपी के खोने या खराब होने के डर से इसे बैन भी करते हैं। समय के साथ कई देशों ने स्थानीय परंपरा के हिसाब से गाउन और कैप में बदलाव भी किए हैं।लेकिन 800 साल पुराना गाउन और 114 साल पुरानी टोपी उछालने की परंपरा आज भी उतनी ही जिंदा है। डिग्री के साथ उछलती टोपी अब मेहनत, जीत और नए सफर की शुरुआत का सबसे बड़ा सिंबल है।

Written by: Mansi Sharma

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