Ajit Doval: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोवाल ने देश के युवाओं से राष्ट्रहित को व्यक्तिगत हितों से ऊपर रखने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहां विकसित राष्ट्र बनने का सुनहरा अवसर मौजूद है। ऐसे समय में युवाओं की जिम्मेदारी केवल अपने करियर तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें राष्ट्र निर्माण में भी सक्रिय योगदान देना चाहिए। पुणे में आयोजित ‘लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार-2026’ समारोह में सम्मानित होने के बाद उन्होंने यह बात कही।
लोकमान्य तिलक से प्रेरणा लेने का आह्वान
अजीत डोवाल ने कहा कि हर भारतीय, विशेष रूप से युवाओं को लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के जीवन, उनके संघर्ष और राष्ट्र के प्रति समर्पण से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि तिलक ने ऐसे समय में देश का नेतृत्व किया, जब अंग्रेजी शासन के खिलाफ आवाज उठाना आसान नहीं था। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी और देशवासियों में आत्मविश्वास जगाया। डोवाल ने कहा कि आज भी उनके विचार राष्ट्र निर्माण के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं।
Ajit Doval: स्वतंत्रता का सही अर्थ समझने की जरूरत
अपने संबोधन में एनएसए ने युवाओं को स्वतंत्रता के वास्तविक अर्थ को समझने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी यह मान सकती है कि भारत हमेशा से स्वतंत्र और मजबूत रहा है, जबकि इसके पीछे अनगिनत बलिदान और संघर्ष छिपे हैं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता का अर्थ केवल अपनी इच्छा के अनुसार जीवन जीना नहीं है, बल्कि अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों का भी ईमानदारी से पालन करना है। राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी निभाना ही सच्ची आजादी का मूल भाव है।
अमित शाह ने की डोवाल के योगदान की सराहना
कार्यक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अजीत डोवाल के योगदान की प्रशंसा करते हुए कहा कि देश उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में जानता है, लेकिन उनके कार्यों का बड़ा हिस्सा ऐसा है जो सार्वजनिक नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि डोवाल देश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों में शामिल हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है।
Ajit Doval: पुणे से पुराने रिश्ते को किया याद
सम्मान समारोह के दौरान अजीत डोवाल ने पुणे से अपने पुराने जुड़ाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बचपन में अपने पिता के साथ वह पहली बार पुणे आए थे, जब उनके पिता की सेना में यहां तैनाती हुई थी। उन्होंने अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा भी यहीं से शुरू की थी। डोवाल ने कहा कि यह शहर उनके जीवन की शुरुआती यादों से जुड़ा है और यहां सम्मानित होना उनके लिए विशेष गर्व और भावनात्मक क्षण है।
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