Monsoon Session: संसद के मानसून सत्र के आखिरी चार दिन बचे हैं और सरकार के सामने परिसीमन, महिला आरक्षण और विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी FCRA से जुड़े अहम विधेयकों को लेकर चुनौती बनी हुई है। इन विधेयकों पर विपक्ष के विरोध के बीच सरकार अब समर्थन जुटाने के लिए रणनीति बदलती नजर आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, परिसीमन और महिला आरक्षण कानून के लिए DMK और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) का समर्थन हासिल करने के उद्देश्य से सरकार FCRA संशोधन विधेयक पर फिलहाल नरमी बरत सकती है।
FCRA बिल पर फिलहाल लग सकता है ब्रेक
संसद की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में मानसून सत्र के बचे दिनों के एजेंडे को अंतिम रूप दिया जाना है। सोमवार की शुरुआती कार्यसूची में चार नए विधेयकों को पेश किए जाने का उल्लेख है, लेकिन FCRA संशोधन विधेयक इसमें शामिल नहीं है। इसी से संकेत मिल रहे हैं कि FCRA को लेकर जारी राजनीतिक विरोध के बीच सरकार इस विधेयक को फिलहाल टाल सकती है। माना जा रहा है कि सरकार का फोकस पहले परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्तावों के लिए जरूरी समर्थन जुटाने पर है।
Monsoon Session: DMK और NCP (SP) पर टिकी नजर
परिसीमन को लेकर DMK पहले ही अपना विरोध जाहिर कर चुकी है। DMK नेता उदयनिधि स्टालिन ने कहा था कि पार्टी ने अतीत में परिसीमन विधेयक का समर्थन नहीं किया और भविष्य में भी इसके समर्थन की संभावना नहीं है। पार्टी अध्यक्ष एमके स्टालिन भी FCRA विधेयक को लेकर विरोध जताते रहे हैं। वहीं, सुप्रिया सुले की अगुवाई वाली NCP (SP) भी FCRA के कुछ प्रावधानों को लेकर आपत्ति जताती रही है। ऐसे में सरकार के सामने चुनौती यह है कि इन दलों को परिसीमन और महिला आरक्षण पर अपने पक्ष में कैसे लाया जाए।
लोकसभा में NDA के पास कितने वोट?
लोकसभा के मौजूदा गणित के मुताबिक, यदि 540 सांसद मतदान करते हैं तो किसी संविधान संशोधन विधेयक को दो-तिहाई बहुमत से पारित कराने के लिए 360 वोटों की जरूरत होगी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार NDA के पास फिलहाल करीब 319 सांसदों का समर्थन है।
इसमें TMC के बागी 20 सांसद और शिवसेना (UBT) से शिवसेना में आए छह सांसद भी शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा YSR कांग्रेस के सांसदों समेत कुछ अन्य सांसदों के समर्थन की उम्मीद भी NDA को है। अगर DMK के 27 सांसद सरकार के पक्ष में मतदान करते हैं तो NDA का आंकड़ा 346 तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में दो-तिहाई बहुमत के लिए उसे करीब 14 और वोटों की जरूरत होगी।
Monsoon Session: DMK ने वॉकआउट किया तो बदलेगा समीकरण
अगर DMK मतदान से बाहर रहती है तो कुल मतदान करने वाले सांसदों की संख्या घट सकती है। ऐसी स्थिति में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा भी नीचे आएगा। उपलब्ध गणित के मुताबिक 518 सांसदों के मतदान करने पर दो-तिहाई का आंकड़ा करीब 345 होगा। इसके बावजूद NDA को लगभग 21 अतिरिक्त सांसदों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। यानी सरकार के लिए DMK का समर्थन या कम से कम मतदान से दूरी बनाना भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
राज्यसभा में NDA की स्थिति मजबूत, फिर भी छह वोटों की कमी
राज्यसभा में NDA की स्थिति लोकसभा के मुकाबले बेहतर बताई जा रही है। फिलहाल NDA के पास करीब 154 सांसद हैं। YSR कांग्रेस के चार सांसदों के समर्थन की उम्मीद के बाद यह संख्या और बढ़ सकती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार दो-तिहाई बहुमत के जरूरी आंकड़े तक पहुंचने के लिए NDA को करीब छह और सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी। ऐसे में राज्यसभा में सरकार के लिए जरूरी संख्या जुटाना लोकसभा की तुलना में अपेक्षाकृत आसान नजर आ रहा है।
Monsoon Session: क्यों महत्वपूर्ण है परिसीमन और महिला आरक्षण?
परिसीमन और महिला आरक्षण का मुद्दा सीधे लोकसभा सीटों के पुनर्गठन और महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों से जुड़ा है। सरकार के लिए इन प्रस्तावों को आगे बढ़ाना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके लिए विपक्षी दलों के कुछ हिस्सों का समर्थन भी जरूरी हो सकता है।
इसी वजह से FCRA विधेयक को लेकर सरकार के रुख में संभावित नरमी को व्यापक राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। अब देखना होगा कि संसद के बचे हुए दिनों में सरकार विपक्षी दलों के बीच सहमति बनाने में कितनी सफल होती है और क्या इन महत्वपूर्ण विधेयकों पर आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो पाता है।
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