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ट्रंप के दबाव के बावजूद सीरिया ने लेबनान में सैन्य दखल से किया इनकार

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Trump: लेबनान में हिज्बुल्लाह और ईरान को लेकर पश्चिम एशिया में तनाव के बीच अमेरिका की रणनीति को बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बावजूद सीरिया ने लेबनान में सीधे सैन्य हस्तक्षेप से दूरी बनाए रखने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि अमेरिका सीरिया की संभावित भूमिका का इस्तेमाल ईरान और हिज्बुल्लाह पर दबाव बढ़ाने के विकल्प के तौर पर करना चाहता है। वहीं ईरान ने सीरिया को लेबनान में सैन्य दखल देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।

ट्रंप ने सीरिया पर क्यों बनाया दबाव?

अमेरिका चाहता है कि सीरिया लेबनान में हिज्बुल्लाह तक हथियारों की सप्लाई और लड़ाकों की आवाजाही रोकने में भूमिका निभाए। इसका सबसे सीमित स्वरूप सीमा सुरक्षा मजबूत करने, हथियारों की तस्करी रोकने और लेबनानी सेना के साथ खुफिया जानकारी साझा करने तक हो सकता है। वहीं, ज्यादा बड़े सैन्य हस्तक्षेप की स्थिति में सीरियाई सेना हिज्बुल्लाह के हथियार नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई या दक्षिणी लेबनान में उसके प्रभाव वाले क्षेत्रों पर नियंत्रण की कोशिश कर सकती है।

Trump: ईरान ने सीरिया को दी कड़ी चेतावनी

सीरिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती ईरान की चेतावनी है। रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान ने दमिश्क को संदेश दिया है कि अगर सीरिया ने लेबनान में सैन्य हस्तक्षेप किया तो ईरान करीब 100 रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना सकता है। ऐसे में सीरिया के सामने बड़ा जोखिम यह है कि लेबनान में किसी भी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई सीधे सीरिया तक पहुंच सकती है। इससे पहले से अस्थिर क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है।

सीरिया के लिए सैन्य दखल क्यों मुश्किल?

दमिश्क के लिए लेबनान में सेना भेजना कई स्तरों पर जोखिम भरा हो सकता है। सैन्य हस्तक्षेप से हिज्बुल्लाह को राजनीतिक रूप से फायदा मिल सकता है और सीरिया-लेबनान दोनों में अस्थिरता बढ़ सकती है। इसके अलावा ईरान की जवाबी कार्रवाई का खतरा भी सीरिया के लिए गंभीर चुनौती है। यही वजह है कि अमेरिकी दबाव के बावजूद दमिश्क सीधे सैन्य विकल्प से बचता नजर आ रहा है।

Trump: अमेरिका की रणनीति पर भी उठे सवाल

सीरिया से सैन्य हस्तक्षेप की लगातार चर्चा को फिलहाल किसी बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत के बजाय अमेरिकी राजनीतिक दबाव की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। सीरिया की संभावित भूमिका का इस्तेमाल हिज्बुल्लाह और ईरान के रणनीतिक गणित को उलझाने के लिए किया जा सकता है। साथ ही इससे लेबनानी सरकार पर भी दबाव बढ़ेगा कि वह देश में मौजूद सभी हथियारों को सरकारी नियंत्रण में रखने की अपनी क्षमता साबित करे। ऐसे में सीरिया का सैन्य दखल भले ही टल गया हो, लेकिन लेबनान को लेकर अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय शक्तियों के बीच तनाव बरकरार है।

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