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मानसून का हिमाचल पर वार, 118 सड़कें बंद; नुकसान 972 करोड़ के पार, 79 मौतें

हिमाचल में बारिश से 118 सड़कें बंद

Himachal Monsoon: बीते दिनों मानसून से होने वाले प्रकोप की खबरें सामने आ रही हैं। इसी बीच हिमाचल प्रदेश में इससे जनजीवन प्रभावित है। 16 अगस्त सुबह तक प्रदेश में 118 सड़कें, 216 पेयजल योजनाएं और 19 बिजली ट्रांसफार्मर प्रभावित हैं। मंडी में सबसे ज्यादा 48 और कुल्लू में 32 सड़कें बंद हैं। 30 जून से 15 अगस्त तक प्राकृतिक आपदाओं में 79 लोगों की मौत हुई, जबकि सड़क हादसों में 104 जानें गईं। मानसून से कुल नुकसान करीब 972.64 करोड़ रुपये दर्ज हुआ है।

मंडी में सबसे ज्यादा सड़कें बंद

बारिश से सबसे अधिक असर मंडी जिले में देखने को मिला है। रिपोर्ट के अनुसार जिले में कुल 48 सड़कें बंद हैं। इनमें सराज में 26, थलौट में पांच, सुंदरनगर में चार, जोगिंद्रनगर में एक, पधर में नौ, धर्मपुर में एक और सरकाघाट में दो सड़कें शामिल हैं। इसके अलावा गोहर में तीन और करसोग में नौ सड़कें भी बंद बताई गई हैं।

बिजली से ज्यादा पानी की योजनाएं प्रभावित

बारिश और भूस्खलन का असर सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है। प्रदेश में 216 पेयजल आपूर्ति योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। वहीं 19 बिजली वितरण ट्रांसफार्मर बाधित बताए गए हैं। राज्य स्तर पर यह स्थिति बताती है कि बारिश के बाद बहाली का दबाव सिर्फ लोक निर्माण विभाग पर नहीं, बल्कि जल शक्ति और बिजली विभाग पर भी बढ़ा है।

मानसून में अब तक 79 लोगों की आपदा से मौत

मानसून सीजन की व्यापक तस्वीर और भी चिंताजनक है। 30 जून से 15 अगस्त 2026 तक की संचयी रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के कारण 79 लोगों की मौत हुई है। इनमें भूस्खलन, बाढ़, डूबने, बिजली गिरने, आग, सांप के काटने, पेड़ या चट्टान से गिरने और अन्य घटनाएं शामिल हैं। जिलेवार आंकड़ों में चंबा में नौ, कांगड़ा में 13, कुल्लू में नौ, लाहौल-स्पीति में 14, मंडी में आठ, शिमला में 11 और सिरमौर में सात मौतें दर्ज हैं। हमीरपुर में दो, किन्नौर में दो, सोलन में एक और ऊना में तीन लोगों की जान गई है।

सड़क हादसों में 104 मौतें अलग से दर्ज

रिपोर्ट में मानसून के दौरान प्राकृतिक आपदाओं से हुई मौतों के अलावा सड़क दुर्घटनाओं में 104 मौतें भी अलग से दर्ज की गई हैं। चंबा और सिरमौर में सड़क हादसों में 16-16 मौतें दर्ज हैं, जबकि कुल्लू में 14, कांगड़ा में 10, सोलन में 10 और ऊना में नौ मौतें हुई हैं।आंकड़ों से यह पता लगाना आसान है कि मानसून से सबसे ज्यादा नुकसान पहाड़ी इलाकों पर सबसे ज्यादा हुआ है।ऐसे में अगले कुछ दिनों में मौसम का मिजाज और बारिश की तीव्रता यह तय करेगी कि मौजूदा नुकसान का आंकड़ा यहीं थमता है या पहाड़ों की मुश्किलें और बढ़ती हैं।

Written by- Anushka

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