Home » स्वास्थ्य » दुनिया की पहली एंटीबायोटिक पेनिसिलिन की खोज कैसे हुई? फफूंद ने बदल दिया मेडिकल इतिहास

दुनिया की पहली एंटीबायोटिक पेनिसिलिन की खोज कैसे हुई? फफूंद ने बदल दिया मेडिकल इतिहास

Penicillin Discovery:

Penicillin Discovery: बैक्टीरियल संक्रमण के इलाज में पेनिसिलिन की खोज को चिकित्सा इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण खोजों में गिना जाता है। खास बात यह है कि इसकी खोज किसी पहले से तय प्रयोग का नतीजा नहीं, बल्कि एक अप्रत्याशित घटना से हुई थी।

Penicillin Discovery: 1928 में हुई पेनिसिलिन की खोज-

बात 1928 की है। स्कॉटलैंड के वैज्ञानिक अलेक्जेंडर फ्लेमिंग अपनी लैब में बैक्टीरिया पर शोध कर रहे थे। इसी दौरान एक पेट्री डिश में फफूंद (फंगस) उग गई। यह फफूंद वहां गलती से पहुंची थी। फ्लेमिंग ने जब पेट्री डिश को ध्यान से देखा तो पाया कि फफूंद के आसपास मौजूद बैक्टीरिया नष्ट हो गए थे। इस घटना ने उनका ध्यान खींचा। उन्होंने आगे शोध किया और पाया कि इस फफूंद से निकलने वाला पदार्थ बैक्टीरिया की वृद्धि रोक सकता है। इसी पदार्थ को बाद में पेनिसिलिन नाम दिया गया।

Penicillin Discovery: पेनिसिलिन ने बदल दिया इलाज का तरीका-

पेनिसिलिन ने बैक्टीरियल संक्रमण के इलाज का तरीका पूरी तरह बदल दिया। इससे कई ऐसे संक्रमणों का इलाज संभव हुआ, जो पहले गंभीर और कई बार जानलेवा साबित होते थे।हालांकि, फ्लेमिंग की खोज के बाद पेनिसिलिन को प्रभावी दवा के रूप में विकसित करने में कई वैज्ञानिकों का योगदान रहा।

द्वितीय विश्व युद्ध में बढ़ी पेनिसिलिन की मांग-

1939 में द्वितीय विश्व युद्ध शुरू होने के बाद पेनिसिलिन की जरूरत तेजी से बढ़ गई। बड़ी संख्या में सैनिक गोलियों, बमों और विस्फोटों से घायल हो रहे थे। खुले घावों में बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा काफी ज्यादा था। ऐसे संक्रमण से सेप्सिस और गैंग्रीन जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती थीं। इसलिए ऐसी दवा की जरूरत थी, जो बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण को रोक सके।

अमेरिका में बड़े पैमाने पर उत्पादन की कोशिश-

युद्ध के दौरान ब्रिटेन के पास बड़े पैमाने पर पेनिसिलिन बनाने के लिए संसाधन सीमित थे। इसके बाद ब्रिटिश और अमेरिकी वैज्ञानिकों के बीच सहयोग बढ़ा। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने बेहतर फंगस स्ट्रेन खोजने और उत्पादन की तकनीक विकसित करने पर काम किया। इससे पेनिसिलिन का बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव हुआ और इसे अधिक लोगों के इलाज में इस्तेमाल किया जा सका।

1945 में मिला नोबेल पुरस्कार-

पेनिसिलिन के विकास में अलेक्जेंडर फ्लेमिंग के साथ हॉवर्ड फ्लोरी और अर्न्स्ट चेन का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। 1945 में इन तीनों वैज्ञानिकों को पेनिसिलिन और उसके चिकित्सीय प्रभाव से जुड़े योगदान के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया। फ्लेमिंग ने पेनिसिलिन की खोज की, जब-कि फ्लोरी और चेन ने इसे शुद्ध करने, इसके प्रभाव को साबित करने और उपचार में इस्तेमाल योग्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया।

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस बनी नई चुनौती-

आज एंटीबायोटिक के गलत या जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल के कारण एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। इसका मतलब है कि कुछ बैक्टीरिया एंटीबायोटिक दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधी हो जाते हैं और दवा उन पर प्रभावी नहीं रहती।

पेनिसिलिन की खोज क्यों थी ऐतिहासिक-

पेनिसिलिन की खोज ने आधुनिक चिकित्सा को नई दिशा दी। एक पेट्री डिश में दिखाई दी फफूंद ने वैज्ञानिकों को ऐसा पदार्थ खोजने का रास्ता दिखाया, जिसने बैक्टीरियल संक्रमणों के इलाज में क्रांति ला दी। हालांकि आज एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस एक बड़ी चुनौती है, लेकिन पेनिसिलिन की खोज को चिकित्सा विज्ञान के इतिहास में एक ऐतिहासिक मोड़ माना जाता है

यह भी पढ़े- Toxic स्टार यश ने बताया पत्नी राधिका संग रिश्ते का राज, बोले- वह मेरी ताकत हैं