BRICS Summit: नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को 18वें BRICS सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। भारत मंडपम में होने वाले इस समिट में BRICS के 11 सदस्य देश हिस्सा लेंगे। यह सम्मेलन संगठन के 20 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित किया जा रहा है। BRICS की शुरुआत 2006 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन के साथ हुई थी। बाद में दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE, इंडोनेशिया और सऊदी अरब भी इससे जुड़े। इंडोनेशिया 2025 में BRICS का पूर्ण सदस्य बना।
BRICS Summit: क्या है भारत का मकसद-
भारत के लिए BRICS की मेजबानी सिर्फ एक सम्मेलन आयोजित करने तक सीमित नहीं है। भारत ने इस समिट की थीम ‘मजबूती, इनोवेशन, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी के लिए निर्माण’ रखी है। सरकार का जोर इंसानियत और आम जनता से जुड़े मुद्दों पर है। भारत चाहता है कि BRICS के जरिए विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक फैसले लेने की प्रक्रिया में ज्यादा प्रभावी भूमिका मिले। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र, IMF और विश्व बैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार की जरूरत पर जोर दिया जा सकता है।
BRICS Summit: पश्चिमी देशों के खिलाफ गठबंधन नहीं बनाना चाहता भारत-
भारत नहीं चाहता कि BRICS को पश्चिमी देशों के खिलाफ किसी गठबंधन के तौर पर देखा जाए। नई दिल्ली इसे अलग-अलग राजनीतिक व्यवस्थाओं और विदेश नीति वाले देशों के बीच सहयोग का मंच मानती है। युद्ध, प्रतिबंध, संरक्षणवाद और सप्लाई चेन में रुकावटों से वैश्विक व्यापार प्रभावित हो रहा है। ऐसे में भारत जरूरी सामान, तकनीक और कच्चे माल की सप्लाई को ज्यादा सुरक्षित और विविध बनाने पर जोर दे सकता है।
डिजिटल पेमेंट और फाइनेंशियल सपोर्ट पर जोर-
18वें BRICS सम्मेलन में क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट, फिनटेक और डिजिटल फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर पर चर्चा होने की उम्मीद है। BRICS देश पारंपरिक वित्तीय व्यवस्था पर निर्भरता कम करने और राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर भी विचार कर सकते हैं। भारत चाहता है कि उभरती अर्थव्यवस्थाएं केवल विकसित देशों की तकनीक का इस्तेमाल न करें, बल्कि टेक्नोलॉजी बनाने और उसके नियम तय करने में भी अहम भूमिका निभाएं।
एनर्जी सेक्टर पर रहेगा फोकस-
भारत BRICS देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना चाहता है। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन और स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़-ने की चुनौतियों पर भी चर्चा हो सकती है। भारत के लिए सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा आर्थिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में ऊर्जा सुरक्षा और क्लीन एनर्जी के बीच संतुलन बनाना BRICS एजेंडे का अहम हिस्सा हो सकता है।
आर्थिक भगोड़ों पर भी सहयोग बढ़ाने की तैयारी-
भारत BRICS देशों के बीच आर्थिक अपराधियों और आर्थिक भगोड़ों से जुड़ी जानकारी साझा करने की व्यवस्था को मजबूत करना चाहता है। इसके तहत अवैध संपत्तियों का पता लगाने और उन्हें वापस लाने के लिए वित्तीय एवं जांच संबंधी जानकारी तेजी से साझा करने पर जोर दिया जा सकता है। प्रस्तावित ढांचे में जानकारी साझा करने के मानक तरीके, संपत्ति की रिकवरी में सहयोग और संबंधित संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल शामिल हो सकता है।
AI और नई तकनीक भी एजेंडे में-
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और नई तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग भी भारत के प्रमुख एजेंडों में शामिल है। भारत चाहता है कि उभरती अर्थव्यवस्थाएं AI के विकास, इस्तेमाल और उससे जुड़े नियमों को तय करने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
सप्लाई चेन को मजबूत करना बड़ी चुनौती-
BRICS के विस्तार के बाद भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक संगठन को प्रभावी और व्यावहारिक बनाए रखना है। अलग-अलग देशों की आर्थिक और विदेश नीति की प्राथमिकताओं के बीच तालमेल बनाते हुए मजबूत सप्लाई चेन, व्यापार, ऊर्जा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में ठोस सहयोग बढ़ाना भारत की बड़ी प्राथमिकता रहेगी।
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