MODI ACT: सोशल मीडिया पर इन दिनों ‘मोदी एक्ट’ नाम तेजी से चर्चा में है। लेकिन सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि ‘मोदी एक्ट’ भारत में किसी कानून या अधिनियम का आधिकारिक नाम नहीं है। यह नाम कुछ हिंदू संगठनों और सामान्य वर्ग से जुड़े लोगों की ओर से SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके पीछे कानून के कथित दुरुपयोग को लेकर उठ रही आपत्तियां और हाल के कुछ मामलों को लेकर पैदा हुआ आक्रोश है।
निशु आजाद मामले के बाद क्यों बढ़ी चर्चा?
हालिया विवाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़े एक मामले के बाद तेज हुआ। निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित विवाद के मामले में स्वतंत्र भारद्वाज को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया और मामले में SC/ST एक्ट भी जोड़ा गया। शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से SC/ST एक्ट सहित अन्य कड़ी धाराएं लगाने की मांग की गई थी।
इसके बाद हिंदू संगठनों ने स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थन में दिल्ली के संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि उनके खिलाफ SC/ST एक्ट लगाने का आधार क्या है और कार्रवाई निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने यह आरोप भी लगाया कि स्वतंत्र भारद्वाज के ब्राह्मण होने के कारण उनके साथ अन्याय हो रहा है। हालांकि ये प्रदर्शनकारियों के आरोप हैं, स्थापित न्यायिक निष्कर्ष नहीं।
MODI ACT: फिर ‘मोदी एक्ट’ नाम कहां से आया?
इसी व्यापक बहस के बीच यूट्यूबर अजीत भारती का मामला भी चर्चा में आया। उनके खिलाफ दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू थाने में SC/ST एक्ट सहित अन्य धाराओं में FIR दर्ज हुई। शिकायत में चंद्रशेखर आजाद, डॉ. भीमराव आंबेडकर और अनुसूचित जाति समुदाय से जुड़ी कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों का आरोप लगाया गया है। भारती ने आरोपों से अलग अपना पक्ष रखा है। इसके बाद भारती ने SC/ST एक्ट को लेकर सवाल उठाते हुए इसे ‘मोदी एक्ट’ कहने की बात कही। सोशल मीडिया पर उनके समर्थकों और कुछ हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों ने इस नाम को आगे बढ़ाया। देखते ही देखते SC/ST एक्ट के विरोध से जुड़े पोस्ट और अभियानों में #ModiAct जैसे शब्दों का इस्तेमाल दिखाई देने लगा।
SC/ST एक्ट को लेकर क्या है विवाद?
SC/ST एक्ट का उद्देश्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों को जातिगत अत्याचार, अपमान, भेदभाव और हिंसा से कानूनी सुरक्षा देना है। लेकिन इसका विरोध करने वाले कुछ संगठन और सामान्य वर्ग से जुड़े लोग आरोप लगाते हैं कि कई मामलों में कानून का दुरुपयोग किया जाता है और इससे निर्दोष लोगों को कानूनी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। दूसरी तरफ, कानून के समर्थकों का तर्क है कि जातिगत अत्याचार आज भी वास्तविक समस्या है और कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए कठोर कानून जरूरी है। इसलिए असली बहस कानून खत्म करने की बजाय उसके सही इस्तेमाल, जांच और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर भी है।
MODI ACT: अजीत भारती मामले से क्यों जुड़ गया ‘मोदी एक्ट’?
अजीत भारती के खिलाफ दर्ज मामले ने इस बहस को और राजनीतिक रंग दिया। उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पटियाला हाउस कोर्ट ने 7 सितंबर 2026 को याचिका खारिज कर दी। मामले में SC/ST एक्ट के साथ BNS और IT Act की धाराएं भी लगाई गई हैं। यही वजह है कि ‘मोदी एक्ट’ अब किसी नए कानून का नाम नहीं, बल्कि SC/ST एक्ट के कथित दुरुपयोग के खिलाफ सोशल मीडिया पर चल रही एक राजनीतिक और वैचारिक मुहिम का प्रतीकात्मक नाम बन गया है। हालांकि कानूनी तौर पर इसे ‘मोदी एक्ट’ कहना सही नहीं है; आधिकारिक कानून का नाम SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम ही है।
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