BRICS Summit 2026: भारत की मेजबानी में आयोजित 18वें BRICS Summit 2026 का 13 सितंबर को समापन हो गया। 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में हुए इस दो दिवसीय सम्मेलन में BRICS के 11 सदस्य देशों और पार्टनर देशों के नेताओं ने हिस्सा लिया। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी समिट में शामिल होने भारत पहुंचे। शी जिनपिंग करीब 7 साल बाद भारत आए। समिट के दौरान भारत, चीन और रूस के बीच कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। सम्मेलन का सबसे प्रमुख दस्तावेज 45 पेज का 140 पॉइंट वाला घोषणा-पत्र रहा, जिसमें कई वैश्विक मुद्दों पर BRICS देशों ने अपनी सहमति जताई।
BRICS Summit 2026: BRICS Summit से भारत को क्या मिला-
आतंकवाद के खिलाफ मिला समर्थन-
समिट में भारत को आतंकवाद के मुद्दे पर BRICS देशों का समर्थन मिला। देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करते हुए सीमा पार आतंकवाद, आतंकियों की फंडिंग और उन्हें पनाह देने के खिलाफ लड़ाई जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।
unscathed में स्थायी सदस्यता के लिए समर्थन-
भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (unscathed) में स्थायी सदस्यता की दावेदारी के लिए भी समर्थन मिला। इसके अलावा BRICS की मेजबानी के जरिए भारत को सदस्य देशों के साथ अपने राजनीतिक, रक्षा और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने का अवसर मिला।
BRICS Summit 2026: BRICS Summit से चीन को क्या मिला-
अमेरिका की टैरिफ नीति का विरोध-
BRICS देशों ने अमेरिका की टैरिफ नीति और एकतरफा प्रतिबंधों के खिलाफ चिंता जाहिर की। इसके चीन को अमेरिका की व्यापारिक नीतियों के खिलाफ BRICS मंच पर समर्थन मिला।
भारत-चीन रिश्तों में सुधार का मौका-
शी जिनपिंग की भारत यात्रा से दोनों देशों के रिश्तों में गर्माहट लाने का अवसर मिला। चीन ने वैश्विक संकटों और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के समाधान के लिए भारत के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता भी जताई।
BRICS Summit से रूस को क्या मिला-
पश्चिमी दबाव के बीच मजबूत संदेश-
यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए हैं। ऐसे समय में पुतिन का BRICS Summit में शामिल होना रूस के लिए अहम रहा। रूस ने BRICS के जरिए यह संदेश दिया कि वह पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद वैश्विक स्तर पर अलग-थलग नहीं है। समिट में रूस को एकतरफा प्रतिबंधों और वैश्विक आर्थिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर BRICS देशों का समर्थन मिला।
BRICS Summit से ईरान को क्या मिला-
इजरायल के खिलाफ मिला समर्थन-
BRICS Summit में ईरान के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। ईरान को इजरायल के खिलाफ BRICS देशों के रुख से राजनीतिक समर्थन मिला।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से मुलाकात की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी उनसे मुलाकात की। दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत हुई।
BRICS Summit से सऊदी अरब को क्या मिला-
ईरान के साथ बातचीत का मंच-
BRICS Summit ने सऊदी अरब को ईरान के साथ बातचीत का अवसर दिया। भारत, रूस और चीन जैसे देशों की मौजूदगी में दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत का रास्ता खुला। लाल सागर में हूती विद्रोहियों से जुड़े हमलों और क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच सऊदी अरब के लिए ईरान के साथ संवाद अहम माना जा रहा है।
BRICS Summit पर अमेरिका की क्यों रही नजर-
BRICS Summit पर अमेरिका की नजर भी रही। सम्मेलन में अमेरिका का सीधे नाम लिए बिना सदस्य देशों ने टैरिफ और एकतरफा प्रतिबंधों के खिलाफ अपना रुख स्पष्ट किया। BRICS देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, वर्ल्ड बैंक और WTO जैसी वैश्विक संस्थाओं में सुधार की मांग भी दोहराई। इसके संकेत मिला कि BRICS देश वैश्विक व्यवस्था में अधिक प्रतिनिधित्व और संतुलन चाहते हैं।
पाकिस्तान को भी मिला सख्त संदेश-
समिट में आतंकवाद के खिलाफ BRICS देशों के सख्त रुख को पाकिस्तान के लिए भी संदेश के तौर पर देखा गया। पहलगाम आतंकी हमले की निंदा और आतंकवाद की फंडिंग व पनाह के खिलाफ कार्रवाई की प्रतिबद्धता भारत के लिए महत्वपूर्ण रही। खास बात यह रही कि यह संदेश ऐसे मंच पर दिया गया, जहां चीन भी BRICS का सदस्य है और पाकिस्तान का करीबी सहयोगी माना जाता है।
इजरायल को लेकर BRICS का क्या रुख रहा-
गाजा में जारी संघर्ष और पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर भी BRICS देशों ने चिंता जाहिर की। इजरायल की सैन्य कार्रवाई और गाजा में मानवीय संकट को लेकर BRICS देशों की ओर से नाराजगी सामने आई। ईरान और पश्चिम एशिया के मुद्दे पर BRICS के रुख ने अमेरिका और इजरायल की नीतियों से अलग एक सामूहिक वैश्विक दृष्टिकोण पेश करने की कोशिश की।
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