BRICS Summit Closing Ceremony: भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का रविवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम् में समापन हो गया। दो दिन तक चले इस सम्मेलन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने समापन संबोधन में सदस्य देशों के नेताओं और उनकी टीमों का आभार जताया। साथ ही उन्होंने BRICS के अगले शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहे चीन को शुभकामनाएं दीं।
लेकिन मोदी के समापन भाषण में चीन का जिक्र सिर्फ औपचारिकता तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने BRICS के भविष्य को लेकर बड़ा संदेश देते हुए कहा कि संगठन अब अपने तीसरे दशक में प्रवेश करने जा रहा है और दुनिया उससे केवल विचारों और वादों की नहीं, बल्कि ठोस नतीजों की उम्मीद करती है।
समापन पर PM मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में सभी देशों की सक्रिय भागीदारी और महत्वपूर्ण योगदान के लिए वह आभारी हैं। उनके मुताबिक नेताओं के विचारों और सुझावों ने BRICS सहयोग को व्यापक और गहरा बनाने में मदद की है। मोदी ने BRICS को सिर्फ देशों का समूह नहीं, बल्कि समाधान देने वाला सिस्टम बताया। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में अपनाया गया ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ साझा सोच और भविष्य के सहयोग को स्पष्ट दिशा देगा।
BRICS Summit Closing Ceremony: ‘सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे घोषणापत्र’
PM मोदी ने अपने संबोधन में एक अहम बात कही। उन्होंने कहा कि समिट में तय किए गए परिणामों को समय-सीमा वाले कामों में बदलना होगा, ताकि उनका असर जमीन पर दिखाई दे। यानी भारत की अध्यक्षता में तैयार हुए घोषणापत्र की असली सफलता सिर्फ उसके स्वीकार किए जाने में नहीं, बल्कि उसके फैसलों को लागू करने में होगी। मोदी ने संकेत दिया कि BRICS का एजेंडा केवल बैठकों और घोषणापत्रों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
BRICS के तीसरे दशक में प्रवेश का क्या मतलब?
प्रधानमंत्री ने कहा कि BRICS अब अपने तीसरे दशक में प्रवेश करने जा रहा है। ऐसे समय में दुनिया इस समूह से सिर्फ घोषणाओं की नहीं, बल्कि वास्तविक परिणामों की उम्मीद कर रही है। उनका संदेश साफ था- BRICS को अब अपनी प्रासंगिकता जमीन पर साबित करनी होगी। व्यापार, तकनीक, ऊर्जा, विकास, स्वास्थ्य और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों पर सहयोग को ठोस परियोजनाओं और परिणामों में बदलना इसकी अगली बड़ी चुनौती होगी।

BRICS Summit Closing Ceremony: चीन का जिक्र क्यों अहम?
भारत की अध्यक्षता में BRICS सम्मेलन खत्म होने के साथ अब संगठन की कमान अगले चरण में चीन के हाथों होगी। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी ने समापन भाषण में चीन को शुभकामनाएं देकर यह संकेत दिया कि भारत BRICS को एक व्यापक बहुपक्षीय मंच के रूप में आगे बढ़ाने के पक्ष में है। भारत और चीन के बीच कई रणनीतिक मतभेद हैं, लेकिन दोनों देश BRICS के महत्वपूर्ण सदस्य हैं। ऐसे में BRICS के भीतर सहयोग और द्विपक्षीय मतभेदों को अलग-अलग स्तर पर संभालना भारत की कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
क्या नई दिल्ली घोषणापत्र भारत की बड़ी उपलब्धि है?
भारत की अध्यक्षता में BRICS के सदस्य देशों के बीच नई दिल्ली घोषणापत्र पर सहमति बनना सम्मेलन की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा। खास बात यह रही कि संगठन में अलग-अलग रणनीतिक हित रखने वाले देश मौजूद हैं। इसके बावजूद कई वैश्विक मुद्दों पर साझा भाषा तैयार की गई। भारत के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उसने BRICS के मंच पर ग्लोबल साउथ, बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार, आर्थिक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय शांति जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी।
BRICS Summit Closing Ceremony: पुतिन और शी जिनपिंग लौटे, भारत का समिट खत्म
सम्मेलन समाप्त होने से पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपना भारत दौरा पूरा कर वापस लौट चुके हैं। अब भारत की अध्यक्षता समाप्त होने के साथ BRICS का अगला चरण शुरू होगा। चीन की मेजबानी में होने वाले अगले सम्मेलन में यह देखना अहम होगा कि नई दिल्ली घोषणापत्र में तय किए गए मुद्दों को किस तरह आगे बढ़ाया जाता है।
मोदी का आखिरी संदेश क्या था?
समापन भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने मूल रूप से BRICS के सामने अगली चुनौती रख दी-बड़े- बड़े घोषणापत्रों से आगे बढ़कर जमीन पर परिणाम दिखाना। भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान जिस तरह अलग-अलग हितों वाले देशों को एक साझा मंच पर साथ लाने की कोशिश की, अब चीन के सामने उस सहयोग को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। यानी नई दिल्ली में BRICS का अध्याय खत्म हुआ है, लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होगी- क्या घोषणाओं को सचमुच ठोस नतीजों में बदला जा सकेगा?
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