UCC: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर बड़ा लक्ष्य सामने रखा है। उन्होंने कहा है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी-NDA शासित सभी 21 राज्यों में UCC लागू कर दिया जाएगा। शाह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब कई राज्यों में UCC को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। हालांकि, उनके इस लक्ष्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब NDA के भीतर से ही आती दिखाई दे रही है। गठबंधन के कुछ सहयोगी दल UCC को लेकर जल्दबाजी के बजाय चर्चा और सहमति की बात कर रहे हैं।
अमित शाह ने 2029 तक के लक्ष्य रखे
अमित शाह ने 13 सितंबर को मुंबई में सेवा संकल्प अभियान से जुड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस में UCC को लेकर कहा कि कई राज्यों में इसे लागू किया जा चुका है और उन्हें भरोसा है कि 2029 से पहले बीजेपी-NDA शासित 21 राज्यों में भी इसे लागू कर दिया जाएगा। यह लक्ष्य आगामी लोकसभा चुनाव से पहले UCC को लेकर बीजेपी की रणनीति को स्पष्ट करता है। अभी उत्तराखंड, गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में UCC कानून को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उत्तराखंड में यह लागू भी हो चुका है।
UCC: UCC को लेकर NDA में अलग-अलग सुर क्या हैं
अमित शाह के बयान के बाद NDA के भीतर सहयोगी दलों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। जेडीयू, टीडीपी और LJP (रामविलास) ने इस मुद्दे पर सावधानी वाला रुख अपनाया है। जेडीयू ने कहा है कि वह गृह मंत्री अमित शाह से इस विषय पर चर्चा करेगी। वहीं टीडीपी का कहना है कि UCC पर आगे बढ़ने से पहले विभिन्न पक्षों को शामिल कर चर्चा जरूरी है। चिराग पासवान ने भी संविधान में अलग-अलग समुदायों की परंपराओं और विविधता को मान्यता मिलने की बात कही है।

बिहार में JDU ने बढ़ाई चिंता
UCC को लेकर सबसे स्पष्ट असहजता बिहार से सामने आई है। जेडीयू के नेताओं ने संकेत दिया है कि बिहार में इसे लागू करने से पहले व्यापक चर्चा और सहमति जरूरी है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने अमित शाह से मुलाकात कर इस मुद्दे पर बातचीत करने की बात कही है। ऐसे में 21 राज्यों में UCC लागू करने के लक्ष्य के बीच सहयोगी दलों की सहमति अहम हो जाती है।
वर्ष 2029 तक NDA शासित सभी राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) आएगा। pic.twitter.com/bMHKNSmuWJ
— Amit Shah (@AmitShah) September 13, 2026
UCC: यूसीसी क्या है और सरकार क्यों दे रही जोर?
समान नागरिक संहिता का उद्देश्य अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए विवाह, तलाक, विरासत और उत्तराधिकार जैसे व्यक्तिगत मामलों में समान कानूनी व्यवस्था बनाना है। बीजेपी लंबे समय से UCC को अपने प्रमुख वैचारिक मुद्दों में शामिल करती रही है। उत्तराखंड में लागू कानून में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। हालांकि, जनजातीय समुदायों की परंपराओं को लेकर राज्यों के UCC कानूनों में विशेष प्रावधान और छूट भी देखने को मिलती है।
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