Voter List Removal: चुनाव आयोग पर वोट चोरी और ईवीएम में गड़बड़ी को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। विपक्षी दलों की ओर से वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं। इन आरोपों के बीच विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर भी विवाद सामने आया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। हालांकि, चुनाव आयोग इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है।चुनाव आयोग का कहना है कि किसी मतदाता का नाम केवल ऑनलाइन माध्यम से वोटर लिस्ट से नहीं हटाया जा सकता। ऑनलाइन पोर्टल और ऐप के जरिए सिर्फ आवेदन जमा किया जा सकता है। इसके बाद संबंधित आवेदन की जांच होती है और निर्धारित प्रक्रिया पूरी की जाती है। आयोग के अनुसार, किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे नोटिस देना और अपनी बात रखने का मौका देना जरूरी है।
वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए क्या है नियम?
मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 के तहत तय की गई है। इन नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी मतदाता का नाम बिना उचित कारण, जांच और प्रक्रिया के वोटर लिस्ट से न हटाया जाए।अगर किसी मतदाता का नाम हटाने की जरूरत है या किसी नाम को लेकर आपत्ति दर्ज करनी है, तो इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होता है।
Voter List Removal: फॉर्म-7 के जरिए दर्ज होती है आपत्ति
किसी मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से हटाने के लिए फॉर्म-7 का इस्तेमाल किया जाता है। कोई मतदाता अपने नाम को हटाने के लिए भी इस फॉर्म का इस्तेमाल कर सकता है। इसके अलावा, एक ही निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत मतदाता किसी दूसरे मतदाता के नाम पर भी आपत्ति दर्ज करा सकता है।फॉर्म में निर्वाचन क्षेत्र, मतदाता का ईपीआईसी नंबर, नाम हटाने का कारण और आवेदक से जुड़ी जरूरी जानकारी दर्ज करनी होती है। आवेदन ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से जमा किया जा सकता है।आवेदन मिलने के बाद उसकी जांच की जाती है। जरूरत पड़ने पर बूथ लेवल ऑफिसर यानी बीएलओ के जरिए जमीनी स्तर पर सत्यापन भी कराया जाता है।
किन वजहों से हट सकता है नाम?
वोटर लिस्ट से किसी व्यक्ति का नाम हटाने के लिए निर्धारित कारण होना जरूरी है। इनमें मतदाता की मृत्यु, स्थायी रूप से दूसरे निर्वाचन क्षेत्र में चले जाना, एक से अधिक जगह नाम दर्ज होना और भारतीय नागरिक नहीं होना जैसे कारण शामिल हैं।सिर्फ राजनीतिक या मनमाने आधार पर किसी व्यक्ति का नाम हटाने की मांग नहीं की जा सकती। आवेदन में दिए गए कारण की जांच भी की जाती है।
Voter List Removal: नाम हटाने से पहले होती है जांच
किसी मतदाता का नाम हटाने का आवेदन मिलने के बाद सीधे उसका नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाया जाता। संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी यानी ईआरओ आवेदन और उपलब्ध जानकारी की जांच करता है।जरूरत पड़ने पर बीएलओ संबंधित पते पर जाकर जानकारी जुटाता है। वह यह जांच सकता है कि संबंधित मतदाता उस पते पर रह रहा है या नहीं, उसकी मृत्यु हो चुकी है या उसका नाम किसी दूसरी जगह भी दर्ज है।इस जांच की रिपोर्ट निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के सामने रखी जाती है। इसके बाद उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होती है।
मतदाता को मिलता है अपनी बात रखने का मौका
अगर किसी मतदाता का नाम हटाने की कार्रवाई प्रस्तावित है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसे नोटिस दिया जाता है। उसे अपनी बात रखने और मामले पर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जाता है।निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी जरूरत के अनुसार संबंधित दस्तावेज मांग सकता है। वह व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए भी कह सकता है और मामले से जुड़ा बयान दर्ज कर सकता है।आवेदन करने वाले व्यक्ति और जिस मतदाता के नाम पर आपत्ति की गई है, दोनों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का अधिकार होता है।सभी दस्तावेजों, जांच रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद ईआरओ फैसला करता है कि आवेदन स्वीकार किया जाए या खारिज।
Voter List Removal: गलत तरीके से नाम हटे तो क्या होगा?
अगर किसी मतदाता को लगता है कि उसका नाम गलत तरीके से वोटर लिस्ट से हटाया गया है, तो वह संबंधित आदेश को निर्धारित अपील प्रक्रिया के तहत चुनौती दे सकता है।पात्रता होने पर वह दोबारा मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए संबंधित आवेदन भी कर सकता है। इसके लिए पहचान और निवास से जुड़े जरूरी दस्तावेज देने पड़ सकते हैं।
फर्जी आवेदन पर भी है कानून
फॉर्म-7 में गलत जानकारी या झूठी घोषणा करना कानून के तहत दंडनीय है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 में चुनाव से संबंधित गलत घोषणा या गलत जानकारी देने पर सजा का प्रावधान है।इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर गलत तरीके से आवेदन करना भी कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है।

Voter List Removal: क्या कोई दूसरा व्यक्ति आपका नाम हटवा सकता है?
कानून के तहत एक ही निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत मतदाता किसी दूसरे मतदाता के नाम पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए फॉर्म-7 दाखिल कर सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आवेदन जमा होते ही संबंधित व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट से हट जाएगा।आवेदन के बाद संबंधित अधिकारी द्वारा जांच और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाती है। बिना जरूरी प्रक्रिया के किसी मतदाता का नाम हटाया नहीं जा सकता।
क्या सिर्फ सॉफ्टवेयर से हटाया जा सकता है नाम?
ऑनलाइन पोर्टल और सॉफ्टवेयर आवेदन को स्वीकार और प्रक्रिया में आगे बढ़ाने का काम कर सकते हैं, लेकिन केवल सॉफ्टवेयर के जरिए किसी मतदाता का नाम अपने आप वोटर लिस्ट से हटाया नहीं जा सकता।किसी आवेदन पर आगे की कार्रवाई के लिए सत्यापन और संबंधित अधिकारी का निर्णय जरूरी होता है। अगर बड़ी संख्या में आवेदन भी जमा किए जाएं, तब भी उनकी जांच निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जानी होती है।यानी फर्जी या गलत आवेदन जमा किए जाने की कोशिश संभव हो सकती है, लेकिन केवल ऐसे आवेदन जमा होने से मतदाता का नाम अपने आप वोटर लिस्ट से नहीं मिटता।
Voter List Removal: क्या है ERONET?
ERONET यानी इलेक्ट्रोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स नेटवर्क मतदाता सूची के प्रबंधन के लिए तैयार की गई एक वेब आधारित व्यवस्था है। इसका इस्तेमाल मतदाताओं के नाम जोड़ने, जानकारी में सुधार करने, पते से जुड़ी जानकारी बदलने और नाम हटाने से संबंधित प्रक्रियाओं को डिजिटल तरीके से संभालने के लिए किया जाता है।इस व्यवस्था ने अलग-अलग राज्यों में इस्तेमाल होने वाली अलग-अलग प्रणालियों को एक समान डिजिटल ढांचे में लाने में मदद की है।
Voter List Removal: क्या है ECINET?
ECINET चुनाव आयोग का एक व्यापक डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसमें चुनाव आयोग की कई डिजिटल सेवाओं और पोर्टल को एक साझा व्यवस्था में लाने का उद्देश्य है।इसके जरिए मतदाता पंजीकरण, आवेदन की स्थिति की जानकारी, ई-ईपीआईसी डाउनलोड करने और चुनाव से जुड़ी अन्य सेवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है।
ERONET और ECINET कैसे काम करते हैं?
ERONET और ECINET मतदाता सूची से जुड़े कामों को डिजिटल तरीके से संभालने में मदद करते हैं। सिस्टम संभावित डुप्लीकेट प्रविष्टियों या रिकॉर्ड में मौजूद कुछ विसंगतियों की पहचान करने में सहायता कर सकता है। इसके आधार पर संबंधित अधिकारियों के लिए आगे की जांच के लिए जानकारी तैयार की जाती है।इसके बाद जरूरत पड़ने पर जमीनी स्तर पर सत्यापन कराया जाता है। बीएलओ संबंधित पते पर जाकर मतदाता और उसके रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी की जांच कर सकता है।अंतिम निर्णय निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के स्तर पर लिया जाता है। इसलिए तकनीकी सिस्टम की भूमिका प्रक्रिया को व्यवस्थित करने और अधिकारियों की सहायता करने की है। किसी मतदाता का नाम हटाने का अंतिम कानूनी निर्णय निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित अधिकारी द्वारा ही लिया जाता है।
Voter List Removal: एक क्लिक से नहीं हटता वोटर लिस्ट से नाम
वोटर लिस्ट से किसी व्यक्ति का नाम हटाना केवल एक क्लिक या ऑनलाइन आवेदन से पूरा होने वाला काम नहीं है। चाहे आवेदन किसी दूसरे मतदाता ने किया हो या ऑनलाइन माध्यम से जमा किया गया हो, उसके बाद निर्धारित जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होती है।मतदाता की स्थिति, आवेदन में दिए गए कारण, दस्तावेजों और जरूरी होने पर जमीनी सत्यापन को देखा जाता है। इसके बाद निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी मामले पर फैसला करता है।इसलिए गलत या फर्जी आवेदन दाखिल करने की कोशिश अलग बात है, लेकिन ऐसे आवेदन के आधार पर बिना निर्धारित प्रक्रिया के किसी मतदाता का नाम सीधे वोटर लिस्ट से नहीं हटाया जा सकता।









