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अजय राय की कुर्सी क्यों गई? कांग्रेस की अंदरूनी कलह, राजेंद्र पाल गौतम की रिपोर्ट और दिल्ली के फैसले की पूरी कहानी

Up Congress

Up Congress: उत्तर प्रदेश कांग्रेस में विधानसभा चुनाव से करीब पांच महीने पहले बड़ा बदलाव हुआ है। अजय राय को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर आराधना मिश्रा ‘मोना’ को कमान सौंपी गई है। यह फैसला अचानक नहीं माना जा रहा। इसके पीछे प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के साथ अजय राय के मतभेद, संगठन को लेकर शिकायतें और 2027 के चुनाव की नई रणनीति को अहम माना जा रहा है।

अजय राय और गौतम के बीच क्यों बढ़ा विवाद?

राजेंद्र पाल गौतम के यूपी प्रभारी बनने के बाद दोनों नेताओं के बीच मतभेद की खबरें सामने आती रहीं। मामला केवल व्यक्तिगत पसंद-नापसंद तक सीमित नहीं रहा। संगठन में किस तरह के नेताओं को आगे बढ़ाया जाए, दलित-पिछड़े और अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व कितना हो तथा पार्टी की चुनावी लाइन क्या रहे, इन मुद्दों पर भी दोनों की सोच अलग बताई गई।

Up Congress: गौतम की रिपोर्ट बनी बदलाव का आधार?

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अजय राय और राजेंद्र पाल गौतम के बीच खींचतान बढ़ने के बाद गौतम ने कांग्रेस आलाकमान को प्रदेश नेतृत्व में बदलाव की रिपोर्ट दी थी। इसमें संगठन के कामकाज और नेतृत्व शैली को लेकर आपत्तियां बताई गई थीं। यही रिपोर्ट बाद में अजय राय को हटाने के फैसले का महत्वपूर्ण आधार बनी।

मंदिर और सामाजिक समीकरण भी मुद्दा

रिपोर्ट के मुताबिक, गौतम ने अजय राय की मंदिरों से जुड़ी राजनीतिक सक्रियता और उनकी शैली पर भी सवाल उठाए थे। गौतम का तर्क था कि कांग्रेस को दलित और वंचित वर्गों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए अलग राजनीतिक संदेश देना चाहिए। यही वजह है कि विवाद को सिर्फ दो नेताओं की व्यक्तिगत लड़ाई के बजाय कांग्रेस की राजनीतिक दिशा से भी जोड़कर देखा गया।

Up Congress: सपा के साथ रिश्ते भी बने चुनौती

अजय राय की समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को लेकर मुखर टिप्पणियां भी कांग्रेस के लिए कई बार असहज स्थिति पैदा करती रही थीं। 2027 में कांग्रेस और सपा के बीच गठबंधन की संभावनाओं के बीच सीट बंटवारा बड़ा मुद्दा है। ऐसे में कांग्रेस ऐसा प्रदेश नेतृत्व चाहती है जो गठबंधन की बातचीत और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बना सके। अजय राय की आक्रामक शैली को उनकी विदाई के संभावित कारणों में गिना जा रहा है।

मोना को कमान देकर क्या संदेश दिया?

अजय राय की जगह आराधना मिश्रा ‘मोना’ को जिम्मेदारी देना कांग्रेस के सामाजिक समीकरण की ओर लौटने का संकेत माना जा रहा है। मोना ब्राह्मण चेहरा हैं, जबकि इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। राजेंद्र पाल गौतम पहले से प्रदेश प्रभारी हैं और देवेंद्र निषाद तथा आलोक प्रसाद को भी संगठन में जिम्मेदारी मिली है। यानी कांग्रेस ने ब्राह्मण, मुस्लिम, दलित और पिछड़े वर्गों को एक साथ साधने की कोशिश की है।

Up Congress: दिल्ली के फैसले ने बदल दिया पूरा खेल

अजय राय ने खुद कहा है कि उनसे जबरन इस्तीफा नहीं मांगा गया और यह कांग्रेस नेतृत्व का फैसला है। उन्होंने राहुल गांधी के साथ अपने संबंधों का भी जिक्र किया और कहा कि वह पार्टी के लिए काम करते रहेंगे। हालांकि, घटनाक्रम यह बताता है कि यूपी संगठन में बदलाव का फैसला शीर्ष स्तर पर काफी विचार-विमर्श के बाद हुआ। अब नई टीम के सामने 2027 से पहले संगठन को मजबूत करने, जिलाध्यक्षों की नियुक्तियां पूरी करने और सपा के साथ सीट बंटवारे में कांग्रेस के लिए सम्मानजनक स्थिति बनाने की चुनौती है।

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