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अमरावती बिल पर लोकसभा में हंगामा, वाईएसआरसीपी का वॉकआउट

Amaravati
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Amaravati: लोकसभा में आंध्र प्रदेश की राजधानी के रूप में अमरावती को वैधानिक दर्जा देने वाले बिल पर जोरदार बहस देखने को मिली। इस दौरान वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने बिल को “निराशाजनक” बताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। पार्टी का कहना है कि बिल में कई महत्वपूर्ण मुद्दों को नजरअंदाज किया गया है, खासकर किसानों के हितों को लेकर स्पष्टता नहीं है।

किसानों के हितों पर उठाए सवाल

वाईएसआरसीपी नेता पी.वी. मिधुन रेड्डी ने कहा कि उनकी पार्टी अमरावती के खिलाफ नहीं है, लेकिन मौजूदा स्वरूप में बिल अधूरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि 29,000 किसानों द्वारा दी गई 34,000 एकड़ जमीन के बदले अब तक उन्हें विकसित प्लॉट और अन्य वादे पूरे नहीं किए गए। साथ ही उन्होंने परियोजना की लागत, जमीन के उपयोग और समयसीमा पर भी सवाल उठाए।

Amaravati: सरकार का पक्ष और बिल का उद्देश्य

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2026 पेश किया। इसका उद्देश्य अमरावती को राज्य की एकमात्र और स्थायी राजधानी के रूप में मान्यता देना है। कांग्रेस सांसद बी. मणिकम टैगोर ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि विकास और निवेश के लिए स्पष्ट राजधानी जरूरी है।

सियासी आरोप-प्रत्यारोप तेज

ग्रामीण विकास राज्य मंत्री पी. चंद्रशेखर ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए पिछली सरकार की तीन राजधानियों की नीति को जिम्मेदार ठहराया। वहीं भाजपा सांसद सी.एम. रमेश ने बिल का श्रेय नरेंद्र मोदी, अमित शाह, चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण को दिया। उन्होंने वाईएसआरसीपी पर अमरावती परियोजना को नुकसान पहुंचाने का आरोप भी लगाया।

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