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11वीं शताब्दी की ऐतिहासिक धरोहर भारत लौटी, नीदरलैंड ने लौटाए चोल साम्राज्य के दुर्लभ ताम्रपत्र

Netherlands Returns Chola Artefacts: नीदरलैंड ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में चोल राजवंश से जुड़े प्राचीन ताम्रपत्र भारत को लौटा दिए। इस कार्यक्रम में उन्होंने डच प्रधानमंत्री मार्क रुटे के साथ भाग लिया और इसे पूरे देश के लिए गर्व का पल बताया।ये ताम्रपत्र 11वीं शताब्दी के हैं और दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों का प्रतीक माने जा रहे हैं। भारत साल 2012 से इन ताम्रपत्रों को वापस लाने की कोशिश कर रहा था। नीदरलैंड में इन्हें “लीडेन प्लेट्स” के नाम से जाना जाता है।

Netherlands Returns Chola Artefacts:

2012 से चल रही थी वापसी की प्रक्रिया

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर बताया कि इन ताम्रपत्रों की वापसी हर भारतीय के लिए खुशी की बात है।इनमें कुल 21 बड़े और 3 छोटे ताम्रपत्र शामिल हैं, जिन पर ज्यादातर लेख तमिल भाषा में लिखे गए हैं।

इनका संबंध चोल सम्राट राजेंद्र चोल प्रथम से है। ये ताम्रपत्र उनके पिता राजेंद्र चोल प्रथम द्वारा दिए गए वचन को औपचारिक रूप देते हैं। साथ ही इनमें चोल साम्राज्य की शक्ति और गौरव का भी वर्णन मिलता है।

चोल संस्कृति और समुद्री शक्ति पर गर्व

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत को चोलों की संस्कृति और उनकी समुद्री ताकत पर बहुत गर्व है।विदेश मंत्रालय के अनुसार, ये ताम्रपत्र तमिलनाडु के नागपट्टिनम में स्थित ‘चूलामणिवर्म-विहार’ को दिए गए अनुदान से जुड़े दस्तावेज हैं।इनमें तमिल और संस्कृत दोनों भाषाओं में लेख लिखे गए हैं। एक हिस्सा संस्कृत में है और दूसरा तमिल में।लगभग 30 किलो वजन वाले ये ताम्रपत्र एक कांस्य की अंगूठी से जुड़े हुए हैं, जिस पर चोल राजवंश की मुहर लगी हुई है। ये 19वीं शताब्दी से नीदरलैंड के लीडेन विश्वविद्यालय में सुरक्षित रखे गए थे।

सांस्कृतिक धरोहर की वापसी से मजबूत हुए रिश्ते

प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड सरकार और लीडेन विश्वविद्यालय का धन्यवाद किया।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत को वापस लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।यह कार्यक्रम डच प्रधानमंत्री की मौजूदगी में हुआ। ये ताम्रपत्र चोल काल के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक अभिलेखों में से एक माने जाते हैं और भारत के बाहर मौजूद तमिल विरासत का अहम हिस्सा रहे हैं।

भारत-नीदरलैंड्स CEO राउंडटेबल में चर्चा

प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड्स की राजधानी हेग में भारत-नीदरलैंड्स सीईओ राउंडटेबल में भी हिस्सा लिया।इस बैठक में निवेश, आर्थिक साझेदारी, सेमीकंडक्टर, शिपिंग, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।नीदरलैंड्स की कई बड़ी कंपनियों के सीईओ ने पिछले 10–12 सालों में भारत में हुए बदलावों की सराहना की और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा की।रॉयल वोपाक के सीईओ डिक रिचेल ने बताया कि उनकी कंपनी एगिस लॉजिस्टिक्स के साथ मिलकर लंबे समय से भारत में काम कर रही है और आगे और निवेश की योजना है।

डच कंपनियों की भारत में निवेश बढ़ाने की इच्छा

वीएनओ एससीडब्ल्यू  के अध्यक्ष कोएन वैन ओस्ट्रोम ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की तारीफ की और कहा कि वे डच कंपनियों को अच्छी तरह समझते हैं।APM टर्मिनल्स के सीईओ कीथ स्वेंडसेन ने भारत की तेज आर्थिक प्रगति की सराहना की और कहा कि EU के साथ व्यापार समझौता रिश्तों को और मजबूत करेगा।उन्होंने बताया कि परिवहन, जहाज निर्माण, कंटेनर उत्पादन और युवाओं के प्रशिक्षण में अच्छी प्रगति हो रही है।

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ साझेदारी के बाद क्रिस्टोफ फौक्वेट ने कहा कि यह भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम है, जो आत्मनिर्भरता के लिए जरूरी है।

भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को मिला समर्थन

बौदेविज्न सीमन्स के सीईओ ने प्रधानमंत्री मोदी की ऊर्जा और दृढ़ता की सराहना की और कहा कि भविष्य में और अच्छे अवसर आने वाले हैं।रोटरडम पोर्ट के सीईओ ने कहा कि जहाज बंदरगाह में खड़े रहने के लिए नहीं, बल्कि व्यापार के लिए बनाए जाते हैं। उन्होंने भारत में हो रहे नए इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश का स्वागत किया।

Netherlands Returns Chola Artefacts: किन अहम मुद्दों पर हुई चर्चा

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से व्यापार, तकनीक और लोगों के बीच संबंध और मजबूत होंगे।उन्होंने सेमीकंडक्टर, समुद्री क्षेत्र, जल प्रबंधन, एग्रीटेक, हाई-एंड मैन्युफैक्चरिंग और एडवांस्ड लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि इस बैठक से नए अवसर खुल रहे हैं और कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में गहन चर्चा हुई।

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