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स्वामी सहजानंद की जयंती पर किसान एकता और आत्मसम्मान पर जोर

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Bihar News: स्वामी सहजानंद सरस्वती की जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह में बिहार के कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि स्वामी सहजानंद के सिद्धांत आज के समय में और अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने कहा कि जब किसान, खेतिहर मजदूर और ग्रामीण समाज आर्थिक व सामाजिक दबावों से जूझ रहे हैं, तब सहजानंद का संगठन और आत्मसम्मान का संदेश नई दिशा देता है। यह कार्यक्रम स्वामी सहजानंद सरस्वती स्मारक समिति द्वारा आयोजित किया गया।

आत्मसम्मान और संगठन का संदेश

रामकृपाल यादव ने कहा कि स्वामी सहजानंद ने किसानों को केवल अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं किया, बल्कि उन्हें आत्मसम्मान और संगठन की शक्ति से भी परिचित कराया। उन्होंने कहा कि किसानों की एकजुटता ही सामाजिक और आर्थिक बदलाव की आधारशिला है।

Bihar News: किसान चेतना के वैचारिक स्तंभ

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व मंत्री डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि स्वामी सहजानंद केवल संत या समाज सुधारक नहीं, बल्कि भारतीय किसान चेतना के वैचारिक स्तंभ थे। उन्होंने जमींदारी प्रथा, सामंती शोषण और सामाजिक असमानता के खिलाफ संगठित संघर्ष को वैचारिक दिशा दी।

सामाजिक न्याय के लिए सामूहिक संकल्प

हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्याम सुन्दर शरण ने कहा कि सहजानंद का विचार लोकतंत्र की उस आत्मा का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें अंतिम व्यक्ति केंद्र में होता है। समारोह के अंत में उपस्थित किसानों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सामाजिक न्याय और किसान अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

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