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BRICS Summit 2026: चीन में अगली समिट, कैसे तय होती है मेजबानी की बारी?

BRICS Summit 2026

BRICS Summit 2026: नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12-13 सितंबर 2026 को 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और यह चौथी बार है जब देश इस महत्वपूर्ण समूह की समिट की मेजबानी कर रहा है। लेकिन भारत के बाद अगली BRICS समिट चीन में होगी। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर BRICS समिट की मेजबानी किस देश को मिलती है और इसका फैसला कैसे किया जाता है? BRICS में अध्यक्षता और समिट की मेजबानी हर साल सदस्य देशों के बीच रोटेशन के आधार पर होती है।

हर साल बदलती है BRICS की अध्यक्षता

BRICS की पहली समिट 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में हुई थी। तभी से हर साल अलग सदस्य देश समूह की अध्यक्षता संभालता है और उसी देश में शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाता है। हालांकि, इसकी कोई सख्त अल्फाबेटिकल व्यवस्था नहीं है। शुरुआती पांच सदस्य देशों—ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका—के बीच आपसी सहमति से अध्यक्षता की बारी तय होती रही है।

BRICS Summit 2026: 2026 में भारत, 2027 में चीन

भारत ने 1 जनवरी 2026 को ब्राजील से BRICS की अध्यक्षता संभाली। इस साल की थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” है। भारत इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में BRICS की अध्यक्षता कर चुका है। अब 2027 में 19वीं BRICS समिट की मेजबानी चीन करेगा। चीन इससे पहले 2011 और 2017 में समिट आयोजित कर चुका है, जबकि 2022 में उसने वर्चुअल समिट की अध्यक्षता की थी।

BRICS में बढ़ी सदस्य देशों की संख्या

BRICS अब मूल पांच देशों तक सीमित नहीं है। 2024 के कजान समिट के बाद मिस्र, इथियोपिया, ईरान और Mae पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद 2025 में बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कज़ाखस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, कजाकिस्तान और वियतनाम पार्टनर देशों के रूप में जुड़े। इससे BRICS का दायरा काफी व्यापक हुआ है।

BRICS Summit 2026: मेजबान देश तय करता है साल का एजेंडा

BRICS की अध्यक्षता सिर्फ समिट आयोजित करने तक सीमित नहीं होती। मेजबान देश उस साल की थीम, प्राथमिकताओं और एजेंडे को दिशा देता है। भारत ने इस बार ‘पीपल-सेंट्रिक’ और ‘ह्यूमैनिटी फर्स्ट’ दृष्टिकोण पर जोर दिया है। यही वजह है कि हर साल BRICS समिट की प्राथमिकताएं मेजबान देश के दृष्टिकोण के अनुसार कुछ अलग दिखाई देती हैं। इस तरह अध्यक्षता का रोटेशन समूह में संतुलन बनाए रखने और अलग-अलग देशों को नेतृत्व का अवसर देने का अहम माध्यम है।

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