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CJI सूर्यकांत ने युवाओं को क्यों दी बड़ी नसीहत? बोले- जिम्मेदारी संभालने के लिए अभी से रहें तैयार

CJI Suryakant: CJI सूर्यकांत ने युवा लॉ ग्रैजुएट्स और वकीलों से न्यायिक संस्थाओं को मजबूत करने की जिम्मेदारी संभालने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी तकनीक, समानता और न्याय की पहुंच जैसे मुद्दों को लेकर अधिक संवेदनशील है।

नई पीढ़ी के कंधों पर होगी बड़ी जिम्मेदारी

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने शनिवार को एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए युवा लॉ ग्रैजुएट्स और वकीलों से देश और न्यायिक व्यवस्था के प्रति अपनी जिम्मेदारियां संभालने के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पिछले आठ दशकों में भारत ने कई बड़ी चुनौतियों को पार किया है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

CJI Suryakant:  न्यायिक संस्थाओं को मजबूत करना युवाओं की जिम्मेदारी

CJI ने कहा कि न्याय के जिन संस्थानों को पिछली पीढ़ियों ने बनाया और मजबूत किया, उन्हें संरक्षित करना और आगे बढ़ाना अब नई पीढ़ी की जिम्मेदारी है। उन्होंने भरोसा जताया कि बार और बेंच युवा वकीलों के विकास के लिए मार्गदर्शन और जरूरी अवसर उपलब्ध कराएंगे।

बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच युवा वकीलों को दी प्रेरणा

अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा कि आज वकालत का क्षेत्र पहले से अधिक प्रतिस्पर्धी हो गया है। युवा वकीलों पर अपनी प्रैक्टिस स्थापित करने का दबाव भी रहता है। इसके बावजूद उन्होंने नई पीढ़ी की बुद्धिमत्ता, क्षमता और न्याय के प्रति समर्पण पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि तकनीक के साथ बड़ी हुई युवा पीढ़ी अदालतों में इसका बेहतर इस्तेमाल कर रही है। साथ ही समानता, समावेशिता और न्याय तक पहुंच जैसे सामाजिक मुद्दों को लेकर भी युवा अधिक संवेदनशील हैं।

CJI Suryakant: स्वतंत्रता आंदोलन में वकीलों की रही अहम भूमिका

CJI सूर्यकांत ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और कानून के बीच गहरे संबंध का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम केवल सशस्त्र संघर्ष तक सीमित नहीं था, बल्कि कानून, याचिकाओं और सार्वजनिक बहसों के जरिए भी औपनिवेशिक शासन को चुनौती दी गई।

उन्होंने महात्मा गांधी, डॉ. बीआर आंबेडकर, सरदार वल्लभभाई पटेल, मोतीलाल नेहरू, बाल गंगाधर तिलक और लाला लाजपत राय जैसे नेताओं का जिक्र किया और कहा कि इनमें से कई महान नेता वकील थे।

कानून का उद्देश्य सिर्फ शासन नहीं, न्याय देना है

CJI ने कहा कि इन नेताओं की विरासत यह सिखाती है कि कानून का उद्देश्य केवल नियम बनाना या शासन करना नहीं, बल्कि न्याय देना, स्वतंत्रता की रक्षा करना और मानवीय गरिमा को कायम रखना है। उन्होंने कहा कि आज भी अदालतें समाज के विभिन्न वर्गों को संवैधानिक अधिकारों की रक्षा, मनमानी कार्रवाई को चुनौती देने और कानून के समक्ष समानता की मांग का मंच उपलब्ध कराती हैं।

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