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गाजियाबाद की दरोगा अस्मिता ने रचा इतिहास, जूडो में भारत को दिलाया पहला गोल्ड, बोली- थैंक्यू योगी जी आपने मेरे सपनों को उड़ान दी

गाजियाबाद की दरोगा अस्मिता ने कॉमनवेल्थ में गोल्ड जीता

Commonwealth Games 2026: त्रिपुरा के एक साधारण परिवार से निकलकर ग्लासगो में भारत का तिरंगा सबसे ऊंचा लहराने वाली अस्मिता डे आज पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गई हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं की 48 किलोग्राम जूडो स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं।

सीएम योगी का जताया आभार

स्वर्ण पदक जीतने के बाद अस्मिता ने अपनी सफलता का श्रेय उत्तर प्रदेश पुलिस की नौकरी को देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया। उन्होंने कहा कि मैं यूपी पुलिस में हूं। मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का धन्यवाद करना चाहती हूं, क्योंकि उन्होंने मुझे यूपी पुलिस में नौकरी दी। इस नौकरी ने मुझे आर्थिक और मानसिक सहारा दिया। इसी के दम पर मैं यहां तक पहुंची और देश के लिए गोल्ड मेडल जीत सकी।

साइकिल रिपेयर की दुकान से कॉमनवेल्थ के पोडियम तक

22 मार्च 2003 को त्रिपुरा के बेलोनिया में जन्मीं अस्मिता डे का बचपन बेहद साधारण परिस्थितियों में बीता। उनके पिता अर्जुन कुमार डे साइकिल रिपेयर की छोटी-सी दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। तीन भाई-बहनों के बीच पली-बढ़ीं अस्मिता ने कभी जूडो खिलाड़ी बनने का सपना नहीं देखा था। खेलों में उनकी शुरुआत 800 मीटर दौड़ से हुई थी और वे जिला स्तर तक पहुंची थीं। इसी दौरान एक कोच की सलाह पर उन्होंने पहली बार जूडो का ट्रायल दिया और यही ट्रायल उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ बन गया।

अस्मिता ने बेलोनिया विद्यापीठ कोचिंग सेंटर में कोच बीना देबनाथ के मार्गदर्शन में जूडो की शुरुआती ट्रेनिंग ली। बाद में उन्होंने त्रिपुरा स्पोर्ट्स स्कूल में माणिक लाल देब से प्रशिक्षण प्राप्त किया। स्कूल प्रतियोगिताओं और खेलो इंडिया में शानदार प्रदर्शन के बाद वर्ष 2018 में उन्हें भोपाल स्थित स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के रीजनल सेंटर में जगह मिली। यहां अनुभवी कोच यशपाल सोलंकी की देखरेख में उन्होंने अपनी तकनीक को निखारा और ‘टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS)’ के डेवलपमेंट ग्रुप तक पहुंचने में सफलता हासिल की।

लगातार अंतरराष्ट्रीय मंच पर किया शानदार प्रदर्शन

अस्मिता डे भारतीय जूडो खिलाड़ी अवतार सिंह और जापान की स्टार जूडोका उटा आबे को अपना आदर्श मानती हैं। साल 2022 में उन्होंने थाईलैंड में आयोजित एशियन कैडेट एवं जूनियर जूडो चैंपियनशिप में अंतरराष्ट्रीय पदक जीतकर त्रिपुरा की पहली महिला जूडो खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया। इसके बाद 2023 में मकाऊ जूनियर एशिया कप में गोल्ड और कुवैत एशियन ओपन में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। वर्ष 2025 में मोरक्को के कैसाब्लांका अफ्रीकन ओपन में स्वर्ण जीतकर उन्होंने अपना पहला सीनियर इंटरनेशनल खिताब हासिल किया। वहीं, 2026 एशियन सीनियर चैंपियनशिप में पांचवें स्थान पर रहकर उन्होंने एशिया की शीर्ष खिलाड़ियों के बीच अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।

ग्लासगो में रचा इतिहास

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के महिला 48 किलोग्राम भार वर्ग में अस्मिता डे का प्रदर्शन शानदार रहा। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने स्कॉटलैंड की ईवा इविंग को ‘इप्पोन’ से हराया। इसके बाद सेमीफाइनल में समर शॉ को मात देकर फाइनल में जगह बनाई। फाइनल मुकाबले में उनका सामना कनाडा की हेइडी क्वाच से हुआ। मुकाबले के दौरान एक समय वह पिछड़ रही थीं, लेकिन उन्होंने धैर्य नहीं खोया। मैच ‘गोल्डन स्कोर’ तक पहुंचा, जहां अस्मिता ने शानदार थ्रो के साथ जीत दर्ज कर भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स जूडो इतिहास का पहला स्वर्ण पदक दिला दिया। अस्मिता डे ने देश में भी लगातार शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में कई स्वर्ण पदक जीते और 2023-24 में जूनियर नेशनल चैंपियन बनीं। उनकी हर सफलता ने उन्हें और अधिक आत्मविश्वासी बनाया और अब उनका अगला लक्ष्य ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीतना है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दी बधाई

अस्मिता डे की ऐतिहासिक उपलब्धि पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया पर उन्हें बधाई दी। उन्होंने लिखा कि ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में महिलाओं की 48 किलोग्राम जूडो स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर मां भारती का गौरव बढ़ाने वाली उत्तर प्रदेश पुलिस की उपनिरीक्षक अस्मिता डे को हार्दिक बधाई। उनका साहस, अनुशासन, संकल्प और परिश्रम देश की बेटियों के लिए प्रेरणा है।

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