Datia BJP Defeat: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी को करारी शिकस्त दी। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को हराकर सीट अपने नाम कर ली। मतगणना के दौरान ही कांग्रेस ने निर्णायक बढ़त बना ली थी और अंततः जीत दर्ज की। चुनाव परिणाम सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि बीजेपी की हार की वजह पूर्व गृह मंत्री और दिग्गज नेता नरोत्तम मिश्रा हैं। हालांकि, राजनीतिक परिस्थितियों और चुनावी समीकरणों पर नजर डालें तो यह दावा पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता।
नरोत्तम मिश्रा पर हार का ठीकरा फोड़ना क्यों उचित नहीं?
बीजेपी की हार के बाद सबसे ज्यादा सवाल नरोत्तम मिश्रा की भूमिका को लेकर उठे, लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान वे लगातार पार्टी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी के साथ दिखाई दिए। उन्होंने मंचों से कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने का संदेश दिया और साफ कहा कि टिकट कटने के बावजूद वे पूरी निष्ठा से पार्टी के साथ हैं। ऐसे में केवल उन्हें हार का जिम्मेदार ठहराना राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से उचित नहीं माना जा सकता।
Datia BJP Defeat: दतिया में हमेशा कड़ा रहा चुनावी मुकाबला
दतिया विधानसभा सीट पर नरोत्तम मिश्रा का चुनावी रिकॉर्ड भी इस बात की पुष्टि करता है कि यहां मुकाबला हमेशा बेहद करीबी रहा है। 2008 में उन्होंने लगभग 11 हजार वोटों से जीत हासिल की थी, जबकि 2013 में भी जीत का अंतर करीब 11 हजार मतों का रहा। 2018 में यह अंतर घटकर महज 2,656 वोट रह गया और 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें 7,742 मतों से हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि यदि नरोत्तम मिश्रा का प्रभाव पूरी तरह खत्म हो चुका होता तो वे स्वयं इतने लंबे समय तक इस सीट पर लगातार जीत दर्ज नहीं कर पाते।दतिया उपचुनाव में सबसे अहम राजनीतिक घटनाक्रम पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की नाराजगी रही। मतदान के बाद कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने दावा किया कि राजेंद्र भारती के कारण कांग्रेस को नुकसान पहुंचा, क्योंकि वे बीजेपी के संपर्क में रहे। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भारती के समर्थकों का वोट पूरी तरह किसी एक दल में ट्रांसफर नहीं हुआ और इससे दोनों दलों के परंपरागत समीकरण प्रभावित हुए। चुनाव परिणाम से पहले ही कांग्रेस ने अनुशासनहीनता के आरोप में राजेंद्र भारती को पार्टी से निलंबित भी कर दिया था।
Datia BJP Defeat: राजेंद्र भारती का स्थानीय प्रभाव भी रहा बड़ा फैक्टर
दतिया की राजनीति में राजेंद्र भारती का प्रभाव कई वर्षों से बना हुआ है। वे बसपा, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसे विभिन्न दलों से चुनाव लड़ चुके हैं और उनका परिवार लंबे समय से क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहा है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर उनका जनाधार किसी भी चुनाव को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। यही वजह है कि इस उपचुनाव में भी उनके राजनीतिक रुख ने चुनावी माहौल पर असर डाला।
टिकट कटने के बावजूद पार्टी के साथ खड़े रहे नरोत्तम
बीजेपी द्वारा टिकट बदलने के बाद कार्यकर्ताओं में कुछ समय के लिए नाराजगी जरूर दिखाई दी, लेकिन नरोत्तम मिश्रा ने लगातार संगठन के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया। उन्होंने सार्वजनिक सभाओं में स्पष्ट कहा कि टिकट किसी की साजिश से नहीं कटा है और सभी कार्यकर्ताओं से आशुतोष तिवारी को जिताने की अपील की। उन्होंने अपने समर्थकों की नाराजगी को भी शांत करने की कोशिश की और पूरे चुनाव अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई।कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह पहले भी दो बार विधायक रह चुके हैं और क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। इसके अलावा वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने दतिया सीट पर जीत दर्ज की थी। ऐसे में उपचुनाव में कांग्रेस पहले से मजबूत स्थिति में थी। बीजेपी ने प्रचार के लिए अपने कई बड़े नेताओं और सरकार की पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन वह स्थानीय स्तर पर मतदाताओं को अपने पक्ष में पूरी तरह लामबंद करने में सफल नहीं हो सकी।दतिया उपचुनाव का परिणाम केवल किसी एक नेता की लोकप्रियता या नाराजगी का नतीजा नहीं माना जा सकता। चुनाव में स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियां, उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़, संगठन की मजबूती, जातीय और क्षेत्रीय समीकरण तथा बगावत जैसे कई कारकों ने मिलकर परिणाम को प्रभावित किया। ऐसे में पूरी हार का जिम्मा केवल नरोत्तम मिश्रा पर डालना राजनीतिक रूप से अधूरा विश्लेषण माना जाएगा।
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