FCRA Bill 2026: विदेशी फंडिंग से जुड़े FCRA Amendment Bill 2026 को लेकर विपक्षी खेमे की शिवसेना (UBT) ने केंद्र की मोदी सरकार के सामने अपना रुख साफ किया है। पार्टी ने कहा है कि वह हर मुद्दे पर सरकार का विरोध नहीं करती। अगर FCRA संशोधन विधेयक देशहित में है और इसमें कुछ गलत नहीं है तो पार्टी इसका समर्थन करने पर विचार कर सकती है। शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने न्यूज एजेंसी PTI को दिए इंटरव्यू में कहा कि सरकार पहले बिल का ड्राफ्ट विपक्ष के सामने रखे। इसके बाद उस पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर प्रस्तावित कानून में सब कुछ ठीक है तो पार्टी को समर्थन करने में कोई परेशानी नहीं होगी। यह बयान नवभारत टाइम्स की 10 अगस्त की रिपोर्ट में प्रकाशित हुआ है।
FCRA Bill 2026: 1976 में आया था FCRA कानून-
आनंद दुबे ने कहा कि FCRA कोई नया कानून नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि Foreign Contribution (Regulation) Act पहली बार 1976 में लागू हुआ था और बाद में इसमें कई संशोधन किए गए। मौजूदा कानूनी ढांचा FCRA Act, 2010 पर आधारित है। 2026 में केंद्र सरकार इसमें एक और संशोधन का प्रस्ताव लेकर आई है। दुबे के मुताबिक, उनकी पार्टी को अभी प्रस्तावित संशोधन का ड्राफ्ट नहीं मिला है। इसलिए ड्राफ्ट देखने और उस पर चर्चा करने के बाद ही अंतिम रुख तय किया जाएगा।
FCRA Bill 2026: ‘अगर देशहित में है तो समर्थन कर सकते हैं’-
आनंद दुबे ने कहा कि अगर किसी ट्रस्ट या NGO को विदेश से पैसा मिलता है तो सरकार को यह जानने का अधिकार है कि पैसा कहां से आ रहा है और उसका इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विदेशी फंडिंग के स्रोत और इस्तेमाल का हिसाब सरकार के पास होना स्वाभाविक प्रक्रिया है। उन्होंने संकेत दिया कि अगर प्रस्तावित कानून वास्तव में देशहित में है तो शिवसेना (UBT) उसका समर्थन करने से पीछे नहीं हटेगी।
‘विपक्ष को विश्वास में लिए बिना कानून लाना गलत’-
हालांकि, शिवसेना (UBT) ने बिल की प्रक्रिया को लेकर सवाल भी उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि अगर सरकार विपक्ष को विश्वास में लिए बिना केवल सदन में अपने बहुमत के आधार पर कानून आगे बढ़ाती है तो वह लोकतांत्रिक चर्चा के लिए ठीक नहीं होगा। दुबे ने कहा कि उनकी पार्टी की लड़ाई देशहित से जुड़े कानूनों के खिलाफ नहीं, बल्कि उस तरीके के खिलाफ है जिसमें विपक्ष को चर्चा में शामिल नहीं किया जाता।
‘हर विषय का विरोध नहीं करते’-
आनंद दुबे ने यह भी कहा कि शिवसेना (UBT) हर मुद्दे पर सरकार का विरोध नहीं करती। उन्होंने दावा किया कि पार्टी ने ऑपरेशन सिंदूर, अनुच्छेद 370 और राम मंदिर जैसे देश से जुड़े मुद्दों पर समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि सकारात्मक और देशहित से जुड़े कदमों पर पार्टी साथ देने के लिए तैयार रहती है।
विदेशी फंडिंग में गड़बड़ी हो तो जांच हो: शिवसेना-UBT-
दुबे ने कहा कि अगर विदेशी फंडिंग को लेकर कोई ठोस सबूत है या किसी संगठन के जरिए किसी अराजक तत्व के भारत में प्रवेश की आशंका है तो सरकार को उसकी जांच करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार के पास जांच एजेंसियां और खुफिया तंत्र मौजूद हैं, इसलिए सबूत होने पर कार्रवाई की जानी चाहिए। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि अगर FCRA को केवल राजनीतिक मुद्दा बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है तो उनकी पार्टी इसका विरोध करेगी। इसी दौरान उन्होंने कहा कि देशभक्ति के मामले में उनकी पार्टी भी किसी से पीछे नहीं है।
क्या है FCRA Amendment Bill 2026-
Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 को 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था। इसका उद्देश्य FCRA के तहत विदेशी योगदान पाने वाले संगठनों की विदेशी फंडिंग और उससे बनी संपत्तियों से जुड़े नियमों में बदलाव करना है। प्रस्तावित कानून में ऐसी स्थिति के लिए Designated Authority का प्रावधान है, जब किसी संगठन का FCRA प्रमाणपत्र रद्द हो जाए, संगठन उसे सरेंडर कर दे या उसका पंजीकरण समाप्त हो जाए। विधेयक में विदेशी योगदान और उससे बनी संपत्तियों की निगरानी, प्रबंधन और कुछ परिस्थितियों में उनके निपटारे के लिए नया ढांचा प्रस्तावित किया गया है।
सरकार का क्या कहना है-
सरकार का कहना है कि FCRA में प्रस्तावित बदलाव विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता, जवाबदेही और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को मजबूत करने के लिए हैं। PIB के अनुसार, 2026 का संशोधन विधेयक अभी संसद के विचाराधीन है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित बदलाव विदेशी योगदान पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए नहीं हैं, बल्कि उसके नियमन और निगरानी से जुड़े हैं।
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