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ED की रेड या सियासी वार? APP सांसद अशोक मित्तल पर एक्शन से क्यों गरमाई सियासत?

AAP नेता के घर पड़ा ईडी का छापा
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ED Raids Ashok Mittal: आम आदमी पार्टी और केंद्र सरकार के बीच टकराव अब खुलकर सामने आता दिख रहा है। पार्टी के राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तड़के छापेमारी ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। यह कार्रवाई सिर्फ एक जांच तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे आने वाले समय की बड़ी राजनीतिक लड़ाई का संकेत भी माना जा रहा है। ED की टीमों ने एक साथ पंजाब, हरियाणा और गुरुग्राम समेत करीब 8 से 9 ठिकानों पर रेड की। जालंधर स्थित मित्तल के आवास पर भी टीम पहुंची, जहां वह खुद मौजूद बताए जा रहे हैं। यह पूरी कार्रवाई लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से जुड़े फंड में कथित अनियमितताओं के आरोपों के तहत की जा रही है। हालांकि, एजेंसी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है, जिससे अटकलों का बाजार और गर्म हो गया है।

AAP का सीधा आरोप

इस कार्रवाई के बाद आम आदमी पार्टी ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बेहद आक्रामक अंदाज में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी पार्टी दबाव में आने वाली नहीं है। उन्होंने साफ शब्दों में लिखा कि हम वो पत्ते नहीं हैं जो टूटकर गिर जाएं, आंधियों को अपनी औकात में रहना चाहिए। वहीं, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस पूरे घटनाक्रम को सीधे-सीधे चुनावी रणनीति से जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पंजाब में चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है और एजेंसियों का इस्तेमाल कर विपक्ष को दबाने की कोशिश की जा रही है। केजरीवाल ने यह भी कहा कि पंजाब की जनता इस तरह की राजनीति को बर्दाश्त नहीं करेगी और इसका करारा जवाब देगी।

ED Raids Ashok Mittal: टाइमिंग पर उठे सवाल

राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि यह छापेमारी ऐसे वक्त पर क्यों हुई, जब AAP ने हाल ही में राज्यसभा में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर पद से हटाकर अशोक मित्तल को उपनेता बनाया था। यानी, जिस नेता को हाल ही में पार्टी ने संसद में बड़ी जिम्मेदारी दी, उसी पर अब ED की कार्रवाई हो रही है—इसे विपक्ष “सियासी संदेश” के तौर पर देख रहा है।

कौन हैं अशोक मित्तल?

अशोक मित्तल अप्रैल 2022 में पंजाब से राज्यसभा सांसद चुने गए थे। वे शिक्षा क्षेत्र से जुड़े एक बड़े नाम हैं और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के साथ उनकी पहचान जुड़ी रही है। संसद में वे रक्षा और वित्त जैसी अहम समितियों के सदस्य रह चुके हैं। फरवरी 2026 में उन्हें भारत-अमेरिका संसदीय मैत्री समूह का सदस्य भी बनाया गया था। इसके अलावा, पहलगाम आतंकी हमले के बाद वे एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में रूस, लातविया, स्लोवेनिया, ग्रीस और स्पेन जैसे देशों का दौरा भी कर चुके हैं।

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