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Kisan पर कर्ज का पहाड़, तमिलनाडु सबसे आगे; केंद्र सरकार के आंकड़ों ने खोली असल तस्वीर

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Kisan News : देश की अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही है, लेकिन खेतों में काम करने वाले करोड़ों किसानों के सामने आर्थिक दबाव अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। खेती के लिए लिया गया कर्ज कई राज्यों में किसानों के लिए भारी बोझ बन चुका है। संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने देशभर के किसानों पर बकाया कर्ज के आंकड़े पेश किए हैं, जिससे यह साफ हुआ है कि किस राज्य के किसान सबसे ज्यादा कर्ज के बोझ तले दबे हैं।

आम तौर पर यह धारणा रही है कि उत्तर प्रदेश या बिहार जैसे बड़े कृषि राज्यों के किसान सबसे ज्यादा कर्ज में होंगे। लेकिन वित्त मंत्रालय की ओर से जारी किए गए आंकड़ों ने इस सोच को बदल दिया है।

Kisan पर सबसे बड़ा कर्ज

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में लिखित जवाब देते हुए बताया कि किसानों पर कुल बकाया कर्ज और ऋणी कृषक परिवारों की राज्यवार स्थिति क्या है। इन आंकड़ों के अनुसार तमिलनाडु इस सूची में सबसे ऊपर है। सरकारी जानकारी के मुताबिक, तमिलनाडु के किसानों पर इस समय करीब 5,06,290.45 करोड़ रुपये का कुल कर्ज बकाया है। इसमें से लगभग 1,65,075.79 करोड़ रुपये फसल ऋण यानी क्रॉप लोन है, जबकि 3,41,214.66 करोड़ रुपये टर्म लोन के रूप में लिया गया है। टर्म लोन आमतौर पर लंबे समय के लिए लिया जाता है, जिसमें ट्रैक्टर, कृषि उपकरण या अन्य मशीनरी खरीदने के लिए बैंक से वित्तीय सहायता ली जाती है।

कुल कितना कर्ज

अगर पूरे देश की बात करें तो किसानों पर बकाया कर्ज की राशि काफी बड़ी है। सरकार के अनुसार भारत में किसानों के ऊपर कुल मिलाकर लगभग 31,34,807.42 करोड़ रुपये का कर्ज है। यह आंकड़ा इस बात की ओर इशारा करता है कि खेती के लिए वित्तीय सहायता पर किसानों की निर्भरता लगातार बढ़ती जा रही है।

राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो तमिलनाडु के बाद दूसरे स्थान पर आंध्र प्रदेश है, जहां किसानों पर लगभग 3,75,254.59 करोड़ रुपये का कर्ज है। तीसरे स्थान पर महाराष्ट्र है, जहां किसानों पर करीब 3,07,293.71 करोड़ रुपये का बकाया ऋण है। चौथे नंबर पर उत्तर प्रदेश आता है, जहां किसानों पर 2,30,096.69 करोड़ रुपये का कर्ज दर्ज किया गया है। वहीं, पांचवें स्थान पर कर्नाटक है, जहां किसानों पर करीब 2,10,244.47 करोड़ रुपये का कर्ज है।

क्रम संख्या राज्य कर्ज (करोड़ रुपये में)
1 तमिलनाडु 5,06,290.45
2 आंध्र प्रदेश 3,75,254.59
3 महाराष्ट्र 3,07,293.71
4 उत्तर प्रदेश 2,30,096.69
5 कर्नाटक 2,10,244.47

बढ़ रही कर्ज पर निर्भरता

विशेषज्ञों का मानना है कि खेती की लागत बढ़ने, आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल और उत्पादन से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण किसान बैंक और वित्तीय संस्थानों से कर्ज लेने पर अधिक निर्भर हो गए हैं। ऐसे में किसानों की आय बढ़ाने और कर्ज के बोझ को कम करने के लिए नई नीतियों और योजनाओं की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है।

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