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लद्दाख में पर्यावरण बचाने के लिए बड़ी पहल, 100 पूर्व सैनिक संभालेंगे मोर्चा, मौके पर ही काट सकेंगे चालान

Ladakh news: बढ़ते पर्यटन और पर्यावरण को हो रहे नुकसान के बीच लद्दाख प्रशासन ने एक अहम कदम उठाया है। केंद्र शासित प्रदेश में पर्यावरण की सुरक्षा के लिए 100 पूर्व सैनिकों को नए पर्यावरण संरक्षण बल (Environmental Protection Force-EPF) में शामिल किया गया है। ये जवान अब पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर नजर रखेंगे और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ मौके पर ही कार्रवाई कर सकेंगे।

संवेदनशील इलाकों में होगी तैनाती

EPF में सेना, अर्धसैनिक बलों और लद्दाख स्काउट्स के पूर्व सैनिकों को शामिल किया गया है। इन्हें पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा। इनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी अवैध ऑफ-रोडिंग, संरक्षित क्षेत्रों में अनधिकृत कैंपिंग और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाना होगी।

Ladakh news: मौके पर ही काट सकेंगे चालान

प्रशासन ने EPF के जवानों को विशेष अधिकार दिए हैं। अब अगर कोई पर्यटक या अन्य व्यक्ति पर्यावरण संबंधी नियमों का उल्लंघन करता है, तो ये जवान मौके पर ही उसका चालान काट सकेंगे। स्थानीय इलाकों की अच्छी जानकारी होने के कारण इन्हें उनके अपने क्षेत्रों में ही तैनात किया गया है।

Ladakh news: किन गतिविधियों पर रहेगी नजर?

पर्यावरण संरक्षण बल विशेष रूप से इन गतिविधियों पर कार्रवाई करेगा: अवैध ऑफ-रोडिंग, संरक्षित क्षेत्रों में बिना अनुमति कैंपिंग, वन्यजीवों का पीछा करना या उन्हें परेशान करना, सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का इस्तेमाल, खुले में प्लास्टिक और अन्य कचरा फेंकना, पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली अन्य गतिविधियां।

हर महीने मिलेगा 25 हजार रुपये वेतन

यह पहल सिर्फ पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि पूर्व सैनिकों के पुनर्वास की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। EPF के प्रत्येक सदस्य को 25,000 रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाएगा, जिससे वे समाज सेवा के साथ अपनी नई जिम्मेदारी भी निभा सकेंगे।

एलजी ने दिलाई पर्यावरण संरक्षण की शपथ

Ladakh news: लद्दाख के एलजी वीके सक्सेना ने EPF के जवानों को हरी झंडी दिखाने के साथ पर्यावरण संरक्षण की शपथ भी दिलाई। उन्होंने कहा कि लद्दाख दुनिया के सबसे संवेदनशील हाई-एल्टीट्यूड इकोसिस्टम में शामिल है, जहां कई दुर्लभ वन्यजीव पाए जाते हैं। ऐसे में बढ़ते पर्यटन के साथ पर्यावरण की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पूर्व सैनिक अपने अनुशासन और ईमानदारी से जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देंगे और स्वच्छता व जैव-विविधता संरक्षण के सच्चे एंबेसडर बनेंगे।

 

 

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