MAHARASTRA NEWS: शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने भाजपा और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर बड़ा हमला बोला है। अपने साप्ताहिक स्तंभ ‘रोखठोक’ में राउत ने आरोप लगाया कि शिवसेना के सांसदों को पार्टी से अलग करने के लिए बड़े स्तर पर खरीद-फरोख्त और राजनीतिक सौदेबाजी की गई। उन्होंने कहा कि पार्टी छोड़ने वाले सांसदों का फैसला वैचारिक मतभेद नहीं, बल्कि सत्ता और राजनीतिक लाभ का परिणाम है।
दल-बदल को बताया जनादेश से विश्वासघात
राउत ने कहा कि शिवसेना के टिकट, कार्यकर्ताओं की मेहनत और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में जनता से मिले जनादेश के आधार पर चुने गए जनप्रतिनिधियों का पार्टी छोड़ना मतदाताओं के विश्वास के साथ सीधा विश्वासघात है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास कार्यों और क्षेत्रीय हितों का हवाला देकर दल-बदल को सही ठहराने की कोशिश की जा रही है।
MAHARASTRA NEWS: ‘आयाराम-गयाराम’ की राजनीति पर साधा निशाना
अपने लेख में राउत ने दल-बदल की तुलना इतिहास के चर्चित विश्वासघातियों मीर जाफर, ब्रूटस, ज्युडास और क्विसलिंग से करते हुए कहा कि आज राजनीतिक निष्ठा बदलने को “बगावत” और “क्रांति” का नाम दिया जा रहा है, जबकि यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सत्ता बचाने और हासिल करने के लिए जनप्रतिनिधियों को तोड़ने की प्रवृत्ति लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है।
‘शिवसेना विचार और संघर्ष की परंपरा’
शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस और बालासाहेब ठाकरे के जन्मशताब्दी वर्ष का जिक्र करते हुए राउत ने कहा कि शिवसेना केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि विचार और संघर्ष की परंपरा है। उन्होंने विश्वास जताया कि जनता समय आने पर ऐसे राजनीतिक व्यवहार और जनादेश के साथ हुए कथित विश्वासघात का जवाब जरूर देगी।
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