Mayawati Statement: उत्तर प्रदेश विधानसभा के सोमवार से शुरू हुए चार दिवसीय मानसून सत्र को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने सरकार और विपक्ष से गंभीर संसदीय आचरण की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह सत्र केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि जनहित, जनकल्याण और प्रदेश की ज्वलंत समस्याओं पर सार्थक चर्चा का मंच बने।
‘हंगामे की भेंट न चढ़े सत्र’
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि चार कार्यदिवस वाले इस मानसून सत्र में 4 अगस्त को राज्य सरकार अनुपूरक बजट पेश करेगी। उन्होंने कहा कि लोगों की अपेक्षा है कि यह सत्र संसद की तरह आरोप-प्रत्यारोप, हंगामे और संकीर्ण राजनीति की भेंट न चढ़े, बल्कि जनता से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रहे।
Mayawati Statement: ‘विधायिका की भूमिका कमजोर नहीं होनी चाहिए’
बसपा प्रमुख ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अफसरशाही को संविधान और जनहित के प्रति जवाबदेह बनाए रखने के लिए विधायिका की भूमिका मजबूत होना जरूरी है। उन्होंने चिंता जताई कि विधानसभा सत्रों की अवधि लगातार कम होती जा रही है, जिससे जनप्रतिनिधियों को महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता।
‘सिर्फ औपचारिकता बनकर न रह जाए सत्र’
मायावती ने सवाल उठाया कि इतना छोटा विधानसभा सत्र क्या अपने वास्तविक उद्देश्य को पूरा कर पाएगा या फिर यह केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है कि सदन की गरिमा बनाए रखें और जनहित के मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा करें।
Mayawati Statement: सरकार और विपक्ष दोनों से अपील
बसपा प्रमुख ने कहा कि संविधान, लोकतंत्र और विधायिका की मजबूती के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों का जिम्मेदार संसदीय व्यवहार आवश्यक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मानसून सत्र में प्रदेश की जनता से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक और परिणामकारी चर्चा होगी।
ये भी पढ़े… दतिया उपचुनाव LIVE: दूसरे राउंड में कांग्रेस 219 वोट से आगे, भाजपा की बढ़त घटी








