INDIA alliance rally: दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया ब्लॉक की ‘चलो दिल्ली’ महारैली के पीछे का साफ संदेश है कि यह रैली अगले साल 2027 में उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों की रणनीति का अहम हिस्सा है।रैली के माध्यम से विपक्षी दल जहां एक ओर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अपने कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने की रणनीति में हैं। ऐसा लगता है कि विधानसभा चुनावों तक INDIA गठबंधन की रणनीति इस मुद्दे को सड़क पर गरमाए रखने की है। यह अलग बात है कि रैली का चुनावी फायदा किस विपक्षी दल को ज्यादा होगा, लेकिन फिलहाल सभी का मकसद सत्तारुढ़ भाजपा को निशाना बनाना है। इंडिया गठबंधन ने मुद्दे को गरमाए रखने के लिए सर्वोच्च अदालत के समक्ष शक्ति प्रदर्शन और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर मॉक पार्लियामेंट के बाद रामलीला मैदान में रैली का आयोजन किया।विपक्षी नेताओं का आरोप है कि उन्हें संसद के भीतर मुद्दों पर बहस का मौका नहीं मिल पाया, संसद में सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी, तो जनता के बीच जाकर आवाज उठाना जरूरी हो गया।
यूपी में किसे ज्यादा फायदा होगा?
राहुल गांधी और अखिलेश यादव एक ही खुले वाहन में बैठकर रैली स्थल रामलीला मैदान में पहुंचे।शायद इस बहाने उन्होंने ऐसा संदेश दिया कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और सपा गठबंधन मजबूती के साथ खड़ा है और दमदार ढंग से चुनाव लड़ेगा। अब यह अलग बात है कि कांग्रेस यूपी में जितनी सीटें मांग रही है, अखिलेश उसे उतनी सीटें देंगे या नहीं? वे तो बहुत कम सीटें देने के मूड में हैं।हालांकि रैली के माध्यम से कांग्रेस को अपना दमखम दिखाने का मौका मिला है कि इंडिया गठबंधन का नेतृत्व करने वाली पार्टी वही है, लेकिन कांग्रेस को यह भी देखना होगा कि यदि यूपी में अखिलेश यादव ने उसे अपेक्षित सीट नहीं दी तो क्या फायदा? रही बात अन्य राज्यों की तो पंजाब में विधानसभा चुनाव को देखते हुए आम आदमी पार्टी इंडिया गठबंधन से अलग राह पर अपना अभियान चलाए हुए है। उत्तराखंड में कांग्रेस नेताओं के आपसी मतभेद खुलकर सामने आते रहे हैं। राहुल गांधी के सामने भाजपा के साथ ही अपनों से भी कम चुनौती नहीं है।
NDIA alliance rally: भाजपा का जवाबी हमला
सत्तारुढ़ भाजपा और एनडीए गठबंधन को विपक्ष की यह रणनीति अच्छी तरह समझ आ रही है। यही वजह है कि भाजपा नेता विपक्ष के हमलों का जोरदार ढंग से जवाब दे रहे हैं। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष को चुनौती दी है कि वे संसद के विशेष सत्र में उन मुद्दों पर खुलकर बहस करें, जिन्हें लेकर वे सड़कों पर हंगामा कर रहे हैं। उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को चुनौती दी कि वे अपने आरोप लेकर संसद आएं, सरकार इस पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। भाजपा नेताओं का तर्क है कि विपक्ष सदन में बहस से कतरा रहा है, लेकिन सड़क पर ड्रामा कर रहा है। इंडिया ब्लॉक की रामलीला मैदान में हुई रैली के जवाब में भाजपा ने भी दिल्ली के हरि नगर से तिलक नगर तक एक पैदल मार्च (पदयात्रा) निकाली। इस मार्च का नेतृत्व केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने किया। इसमें दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और अन्य वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए।भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि जिस दिन 1984 के सिख नरसंहार की यादें हैं, उसी दिन कांग्रेस और विपक्ष अपनी राजनीति कर रहे हैं। साथ ही विपक्ष के प्रदर्शन को लोकतंत्र विरोधी बताया गया।








