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कौन हैं नेहा पच्चीसिया, जिन्हें CM ने किया सस्पेंड? एयर होस्टेस से DSP बनने तक की पूरी कहानी; जानें पूरा मामला

Neha Pachisia Controversy: मध्यप्रदेश में कटनी की CSP नेहा पच्चीसिया इन दिनों FIR और सस्पेंशन को लेकर चर्चा में हैं। कभी एयर इंडिया में एयर होस्टेस के तौर पर काम करने वाली नेहा ने MPPSC परीक्षा में 20वीं रैंक हासिल कर पुलिस सेवा में जगह बनाई थी। गुना में CSP रहते हुए महिला सुरक्षा से जुड़े कामों को लेकर उन्हें पहचान मिली और कोरोना काल में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी सम्मानित किया था। अब कटनी में उनके खिलाफ दर्ज FIR और कई आरोपों के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें सस्पेंड करने के निर्देश दिए हैं। जिसके बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है .

मामला केवल एक शिकायत तक सीमित नहीं है। कथित वसूली की शिकायत से शुरू हुई जांच हत्या के एक मामले में पुलिस कार्रवाई, जमीन के सौदे और कथित वित्तीय लेन-देन तक पहुंची। ऐसे में सवाल है कि नेहा पच्चीसिया कौन हैं, उनके खिलाफ क्या आरोप हैं और मामला सस्पेंशन तक कैसे पहुंचा?

एयर होस्टेस से पुलिस अफसर तक कैसे पहुंचीं नेहा?

नेहा पच्चीसिया मूल रूप से मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के पचोर की रहने वाली हैं। 12वीं के बाद उन्होंने एविएशन में डिप्लोमा किया और एयर इंडिया में एयर होस्टेस के तौर पर काम किया। इसके बाद उन्होंने कुछ मल्टीनेशनल कंपनियों में भी नौकरी की।

इसके बाद में उन्होंने सरकारी सेवा में जाने का फैसला किया। इसके बाद स्टेट लेवल की परीक्षा की तैयरियां शुरु कर दी . 2012 से 2015 तक तैयारी के बाद MPPSC-2012 परीक्षा में उन्होंने प्रदेश में 20वीं रैंक हासिल की। परीक्षा का अंतिम परिणाम 2016 में आया। पुलिस सेवा में आने से पहले उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग में भी काम किया। DSP बनने के बाद उनकी पहली प्रमुख मैदानी पोस्टिंग गुना में CSP के तौर पर हुई। यहां महिला सुरक्षा के लिए महिला मोबाइल पुलिस स्टेशन शुरू करने को लेकर उन्हें सराहना मिली। इसी दौरान उन्हें ‘लेडी सिंघम’ के नाम से भी जाना जाने लगा। कोरोना काल में बेहतर काम करने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें सम्मानित किया था।

Neha Pachisia Controversy: गुना से कटनी तक, विवादों से भी जुड़ा रहा सफर

गुना में पोस्टिंग के दौरान नेहा का नाम विवादों में भी आया। 2021 में तबादले के बाद उनके नाम से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट सामने आई थी, जिसमें तत्कालीन ग्वालियर रेंज IG पर सवाल उठाए गए थे। नेहा ने इसे बदनाम करने की साजिश बताया था। इसके बाद उन्होंने भोपाल पुलिस मुख्यालय और खंडवा में भी सेवाएं दीं। मई 2025 में उन्हें कटनी का CSP बनाया गया। अब कटनी में उनकी पोस्टिंग के दौरान सामने आए मामलों ने उन्हें फिर सुर्खियों में ला दिया है।

CM ने सस्पेंड क्यों किया?

नेहा पच्चीसिया के खिलाफ 19 अगस्त को कुठला थाने में FIR दर्ज की गई। इसमें उनके साथ क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ अहमद हनफी के नाम भी शामिल हैं। FIR में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उनके निलंबन के निर्देश दिए। पुलिस मुख्यालय ने उनके CSP कार्यालय को भी सीज कर दिया। पुलिस के मुताबिक कार्यालय सीज करने का उद्देश्य जमीन सौदे से जुड़े दस्तावेज, केस डायरी, कार्यालयीन रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना है।

वसूली की शिकायत से शुरू हुआ मामला

मामले की एक कड़ी कटनी के ट्रांसपोर्ट कारोबारी की शिकायत से जुड़ी है। कारोबारी ने आरोप लगाया कि चेकिंग के दौरान उसकी हाईवा गाड़ी रोककर 30 हजार रुपये मांगे गए और 25 हजार रुपये मौके पर लिए गए। शिकायत के बाद SP स्तर पर प्रारंभिक जांच हुई। CSP के चालक/आरक्षक केशव सिंह को निलंबित किया गया और कुछ थानों का प्रशासनिक नियंत्रण भी दूसरे अधिकारी को सौंपा गया। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ता गया।

Neha Pachisia Controversy: हत्या केस और जमीन का विवाद कैसे जुड़ा?

एक हत्या के मामले में आरोपी रमेश लोधी को तय समय सीमा में चालान पेश नहीं होने के कारण डिफॉल्ट बेल मिलने का मामला भी जांच में सामने आया। इसके बाद रमेश लोधी की जमीन से जुड़े सौदे को लेकर आरोप लगाए गए। पुलिस जांच रिपोर्ट के मुताबिक कंहवारा स्थित जमीन की सरकारी गाइडलाइन कीमत 82.86 लाख रुपये से अधिक थी, जबकि इसकी रजिस्ट्री 18.20 लाख रुपये में हुई। हालांकि परिवार की ओर से इससे अलग दावा किया गया है। परिवार का आरोप है कि जमीन का सौदा 1.07 करोड़ रुपये में तय हुआ था, लेकिन उन्हें केवल 15 लाख रुपये मिले। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 1.07 करोड़ रुपये में सौदा होने और बाकी रकम नहीं मिलने की बात परिवार का आरोप है।

खरीदार कोई और, पैसा किसी और के खाते से क्यों आया?

जांच रिपोर्ट के मुताबिक रजिस्ट्री में जमीन का खरीदार मारूफ अहमद हनफी था। लेकिन पुलिस को उसके बैंक खाते में पर्याप्त रकम नहीं मिली। रजिस्ट्री के दिन उसके खाते में दो जगहों से रकम आई। जांच के अनुसार 10 लाख रुपये ‘शाइन पार्टनर्स’ नाम की फर्म से और 5 लाख रुपये क्षितिज राज बारापात्रे के खाते से आए। जांच में ‘शाइन पार्टनर्स’ के खाते और क्षितिज राज बारापात्रे के खाते में समान PAN का उल्लेख किया गया है। पुलिस ने इसी आधार पर लेन-देन की भूमिका की जांच शुरू की। जांच रिपोर्ट में मारूफ को कथित तौर पर फ्रंटमैन बताया गया है। वहीं क्षितिज राज बारापात्रे को नेहा पच्चीसिया का करीबी बताया गया है। हालांकि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि नेहा ने खुद जमीन के लिए पैसा दिया या लिया। फिलहाल पुलिस की जांच कथित सांठगांठ और लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने पर केंद्रित है।

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अब नेहा पच्चीसिया का क्या होगा?

अब मामले में तीन स्तर पर कार्रवाई आगे बढ़ेगी। पहला, FIR के आधार पर आपराधिक जांच होगी। इसमें जमीन के दस्तावेज, बैंक ट्रांजैक्शन, केस डायरी और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जाएगी। दूसरा, विभागीय जांच में सरकारी अधिकारी के तौर पर उनके आचरण और जिम्मेदारियों की समीक्षा होगी। तीसरा, SIT जमीन सौदे और कथित वसूली से जुड़े मामलों की जांच करेगी। फिलहाल नेहा पच्चीसिया सस्पेंड हैं। इसका मतलब यह है कि वे सरकारी सेवा में बनी हुई हैं, लेकिन उन्हें फिलहाल कोई पदभार नहीं दिया गया है। उनके खिलाफ लगे आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

एयर होस्टेस से पुलिस अधिकारी बनने वाली नेहा पच्चीसिया का करियर एक समय महिला सुरक्षा और कोरोना काल में काम को लेकर चर्चा में रहा था। अब वही अधिकारी FIR, कथित वसूली, पुलिस कार्रवाई और जमीन सौदे से जुड़े आरोपों के कारण जांच के घेरे में हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच में सामने आई कड़ियां आखिर किस निष्कर्ष तक पहुंचती हैं और नेहा पच्चीसिया की भूमिका को लेकर अंतिम तौर पर क्या तथ्य सामने आते हैं।

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