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नेपाल बाढ़ पर चीन पर गंभीर आरोप, विशेषज्ञ ने ग्लेशियर से छेड़छाड़ का जताया शक

Nepal News

Nepal News: नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद इसके कारणों को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। बाढ़ विशेषज्ञ डॉ. विजय कुमार ने दावा किया है कि तिब्बत में ग्लेशियर और नदियों के प्राकृतिक प्रवाह में कथित हस्तक्षेप इस आपदा की वजह हो सकता है। उन्होंने इसे चीन की सोची-समझी रणनीति बताते हुए आरोप लगाया कि बाढ़ के जरिए नेपाल में अस्थिरता पैदा कर उसे भारत से दूर करने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, उपलब्ध वैज्ञानिक आकलनों में ग्लेशियर के टूटने और उससे पैदा हुए मलबे के बहाव को बाढ़ का संभावित कारण बताया गया है; चीन की साजिश का स्वतंत्र रूप से कोई प्रमाण सामने नहीं आया है।

तिब्बत में ग्लेशियर से छेड़छाड़ का दावा

डॉ. विजय कुमार के मुताबिक, ग्लेशियर का टूटना महज प्राकृतिक घटना नहीं माना जाना चाहिए। उनका दावा है कि तिब्बत में नदियों के प्रवाह में मानवीय हस्तक्षेप से दबाव और पर्यावरणीय असंतुलन पैदा हुआ, जिसका असर हिमालयी नदियों पर पड़ा। उन्होंने भारत सरकार से इस पूरे मामले को चीन के सामने उठाने की मांग की।

Nepal News: नदी का रुख मोड़ने का लगाया आरोप

विशेषज्ञ ने आरोप लगाया कि तिब्बत से भारत की ओर आने वाली नदियों के प्रवाह को प्रभावित करने की कोशिश की गई है। उनके अनुसार, गंगा की सहायक नदियों के व्यवहार में बदलाव का असर भारत के बड़े हिस्से पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि चीन की गतिविधियों और हिमालयी पर्यावरण में हो रहे बदलावों की गंभीर जांच जरूरी है। हालांकि वैज्ञानिक रिपोर्टों के मुताबिक, मौजूदा बाढ़ के पीछे ग्लेशियर के बड़े हिस्से के टूटने से पैदा हुआ बर्फ, चट्टान और मलबे का तेज बहाव प्रमुख कारण माना जा रहा है।

नेपाल में अस्थिरता पैदा करने की आशंका

डॉ. विजय कुमार ने दावा किया कि चीन बाढ़ की परिस्थितियों का इस्तेमाल नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ाने के लिए कर सकता है, ताकि नेपाल पर उसका प्रभाव मजबूत हो और वह भारत के खिलाफ खड़ा हो। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को भारत की सुरक्षा और नदी जल प्रबंधन से जोड़ते हुए सतर्क रहने की जरूरत बताई।

Nepal News: हिमालयी नदियों पर बढ़ी चिंता

नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़ ने हिमालयी क्षेत्र में आपदा के बढ़ते खतरे को सामने ला दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार ग्लेशियर और हिमालयी भू-भाग में बदलाव से अचानक बाढ़ और मलबे के तेज बहाव का जोखिम बढ़ सकता है। मौजूदा घटना में भी वैज्ञानिकों ने ग्लेशियर के ढहने और उससे बने मलबे के बहाव को प्रमुख कारण माना है।  ऐसे में तिब्बत और हिमालयी क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों की निगरानी, सीमा पार जल प्रवाह की जानकारी साझा करने और समय रहते चेतावनी व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत और बढ़ गई है।

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