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पेशाब की धार कमजोर या रुक-रुक कर आती है? पुरुषों में हो सकते हैं ये 7 कारण

Weak Urine Stream:

Weak Urine Stream: पुरुषों में पेशाब की धार कमजोर होना या रुक-रुककर पेशाब आना एक आम समस्या हो सकती है। कई पुरुष इसे उम्र बढ़ने का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, खासकर 50 साल की उम्र के बाद। हालांकि, इसके पीछे बढ़ा हुआ प्रोस्टेट ही नहीं, बल्कि यूरिन इंफेक्शन, मूत्रमार्ग में संकुचन और ब्लैडर की कमजोरी जैसी कई वजहें हो सकती हैं। इस समस्या के संभावित कारणों को समझने के लिए हमने Dr. Vineet Malhotra, Senior Consultant in Urology & Andrology, VNA Hospital, Delhi से बात की।

Weak Urine Stream: पुरुषों में पेशाब की धार कमजोर होने के प्रमुख कारण-
बढ़ा हुआ -प्रोस्टेट

उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों में प्रोस्टेट का आकार बढ़ना आम है। इसे बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (BPH) कहा जाता है। बढ़ा हुआ प्रोस्टेट मूत्रमार्ग पर दबाव डाल सकता है, जिससे पेशाब की धार कमजोर या रुक-रुककर आने लगती है।

इसके साथ ये लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं:

– पेशाब शुरू करने में समय लगना
– बार-बार पेशाब आना
– रात में कई बार पेशाब के लिए उठना
– पेशाब की धार बीच में रुकना
– पेशाब के बाद भी ब्लैडर भरा हुआ महसूस होना
– अंत में बूंद-बूंद पेशाब आना

ध्यान देने वाली बात यह है कि प्रोस्टेट का बढ़ना हमेशा कैंसर का संकेत नहीं होता।

Weak Urine Stream: यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI)-

पुरुषों में UTI महिलाओं की तुलना में कम देखने को मिलता है, लेकिन संक्रमण होने पर पेशाब के फ्लो पर असर पड़ सकता है। यूरिनरी ट्रैक्ट में संक्रमण और सूजन के कारण पेशाब करने में परेशानी हो सकती है। कमजोर धार के साथ पेशाब में जलन या दर्द, बार-बार पेशाब लगना, बदबू या धुंधला पेशाब और बुखार जैसे लक्षण हों, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

मूत्रमार्ग में संकुचन-

कभी-कभी समस्या प्रोस्टेट में नहीं, बल्कि उस नली में होती है जिससे पेशाब शरीर से बाहर निकलता है। इसे यूरेथ्रल स्ट्रिक्चर कहा जाता है। पुराना संक्रमण, चोट या कैथेटर के इस्तेमाल के कारण मूत्रमार्ग संकरा हो सकता है। इससे पेशाब की धार कमजोर हो जाती है और गंभीर स्थिति में पेशाब पूरी तरह रुक भी सकता है।

ब्लैडर की मांसपेशियों का कमजोर होना-

पेशाब को शरीर से बाहर निकालने के लिए ब्लैडर की मांसपेशियों का ठीक से काम करना जरूरी है। उम्र बढ़ने, कुछ न्यूरोलॉजिकल समस्याओं या लंबे समय तक ब्लैडर खाली करने में परेशानी के कारण ये मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं। ऐसे में पेशाब की धार कम हो सकती है और पेशाब करने के बाद भी ब्लैडर में कुछ यूरिन बचा रह सकता है। बार-बार पेशाब करने के बावजूद ब्लैडर खाली न होने का एहसास हो, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

प्रोस्टेट में सूजन-

प्रोस्टेटाइटिस में प्रोस्टेट में सूजन हो जाती है, जिससे पेशाब का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। कुछ मामलों में यह बैक्टीरियल इंफेक्शन से जुड़ी होती है। इसमें कमजोर या रुक-रुककर आने वाली धार के साथ पेशाब में जलन, बार-बार पेशाब आना, पेल्विस या कमर के निचले हिस्से में दर्द और बुखार जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

किडनी स्टोन-

किडनी या यूरिनरी ट्रैक्ट में मौजूद पथरी अगर पेशाब के रास्ते में रुकावट पैदा करती है, तो यूरिन का फ्लो प्रभावित हो सकता है।कमजोर धार के साथ कमर या पेट में तेज दर्द, पेशाब में खून, मतली और उल्टी जैसे लक्षण हो सकते हैं। अगर रुकावट ज्यादा हो, तो पेशाब पूरी तरह बंद होने का खतरा भी रहता है।

कुछ दवाएं या नसों से जुड़ी समस्या-

कुछ दवाएं ब्लैडर या पेशाब की नली के काम करने के तरीके को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा पार्किंसंस डिजीज, मल्टीपल स्केलेरोसिस, स्ट्रोक और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी कुछ समस्याएं भी ब्लैडर खाली करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। अगर किसी नई दवा को शुरू करने के बाद पेशाब से जुड़ी समस्या शुरू हुई है, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी दें। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा खुद से बंद न करें।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए-

अगर पेशाब की धार लगातार कमजोर हो रही है, पेशाब शुरू करने में काफी समय लग रहा है, बार-बार पेशाब आ रहा है या ब्लैडर पूरी तरह खाली न होने का एहसास हो रहा है, तो इसे सिर्फ उम्र का असर मानकर नजरअंदाज न करें। पेशाब पूरी तरह बंद हो जाए, तेज दर्द हो, बुखार आए या पेशाब में खून दिखाई दे, तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है

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