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New Delhi: बजरंग दल से टकराने वाले युवक मोहम्मद दीपक से क्यों मिले राहुल गांधी ?

New Delhi: बजरंग दल से टकराने वाले युवक मोहम्मद दीपक से क्यों मिले राहुल गांधी

New Delhi: उत्तराखंड के कोटद्वार में दुकान नाम विवाद के बाद चर्चा में आए जिम संचालक मोहम्मद दीपक और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की दिल्ली में हुई मुलाकात ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। जहां कांग्रेस इस मुलाकात को इंसानियत और भाईचारे का संदेश बता रही है, वहीं विरोधी दल इसे एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति और प्रतीकात्मक राजनीति करार दे रहे हैं।

10 जनपथ में मुलाकात, राजनीतिक संदेश पर चर्चा

दिल्ली स्थित 10 जनपथ में हुई इस मुलाकात के बाद दीपक ने कहा कि राहुल गांधी ने उन्हें डरने की जरूरत नहीं बताई और उनके कदम को सही बताया। साथ ही यह भी कहा गया कि राहुल गांधी कोटद्वार आकर उनके जिम की सदस्यता लेने की बात कर रहे हैं।हालांकि, इस मुलाकात के सामने आते ही राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगे कि क्या यह एक सामान्य समर्थन था या फिर एक खास संदेश देने की कोशिश।

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विपक्षी नेताओं और कुछ सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया कि इस तरह की मुलाकातें जमीनी विवादों को सुलझाने के बजाय उन्हें राजनीतिक रंग देने का काम करती हैं। उनका कहना है कि एक स्थानीय घटना को राष्ट्रीय स्तर पर उछालकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है।कुछ आलोचकों ने यह भी कहा कि राहुल गांधी द्वारा पहले सोशल मीडिया पर दीपक को “हीरो” बताना और फिर मुलाकात करना, एक तयशुदा नैरेटिव बनाने की रणनीति लगती है।

New Delhi: कांग्रेस का बचाव: मोहब्बत की राजनीति का हिस्सा

कांग्रेस नेता वैभव वालिया ने मुलाकात का बचाव करते हुए कहा कि यह भारत जोड़ो अभियान की सोच का हिस्सा है और इंसानियत के लिए खड़े होने वाले युवाओं को प्रोत्साहन देना जरूरी है। पार्टी का कहना है कि समाज में सौहार्द बनाए रखने वालों का समर्थन करना राजनीति नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है।

क्या था कोटद्वार का पूरा विवाद?

26 जनवरी को कोटद्वार में एक कपड़ों की दुकान के नाम को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि कुछ कार्यकर्ता दुकान के बाहर जमा हुए और नाम बदलने का दबाव बना। इसी दौरान दीपक कुमार ने कथित तौर पर दुकानदार के समर्थन में आवाज उठाई और मामला शांत कराने की कोशिश की।घटना के बाद यह मामला सोशल मीडिया से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक चर्चा का विषय बन गया।दिल्ली में हुई इस मुलाकात ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या स्थानीय सामाजिक विवादों में बड़े नेताओं की एंट्री समाधान लाती है या उन्हें और राजनीतिक बना देती है।फिलहाल, राहुल गांधी और मोहम्मद दीपक की मुलाकात को लेकर समर्थक और विरोधी अपने-अपने तरीके से इसे पेश कर रहे हैं, लेकिन इतना तय है कि यह घटना आने वाले समय में भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बनी रहेगी।

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