Home » Breaking News » 10 साल में ₹422 करोड़ से ₹1.55 लाख करोड़ पहुंचा कारोबार, पीयूष गोयल बोले- बदली सरकारी खरीद की तस्वीर

10 साल में ₹422 करोड़ से ₹1.55 लाख करोड़ पहुंचा कारोबार, पीयूष गोयल बोले- बदली सरकारी खरीद की तस्वीर

Piyush Goyal News: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) ने देश में सार्वजनिक खरीद की तस्वीर बदल दी है। उन्होंने बताया कि करीब एक दशक पहले जहां जीईएम का सकल व्यापारिक मूल्य (जीएमवी) महज 422 करोड़ रुपये था, वहीं अब यह बढ़कर 1.55 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।

पारदर्शी और डिजिटल खरीद का बना आधार

पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा पोस्ट में कहा कि जीईएम आज पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और डिजिटल सरकारी खरीद व्यवस्था का मजबूत आधार बन चुका है। उन्होंने बताया कि पोर्टल पर 12.28 लाख से अधिक सूक्ष्म एवं लघु उद्यम (एमएसई) पंजीकृत हैं। इनमें 2.25 लाख से अधिक महिला उद्यमियों द्वारा संचालित इकाइयां शामिल हैं। इसके अलावा 42 हजार से अधिक स्टार्टअप भी जीईएम से जुड़े हैं।

Piyush Goyal News: खरीद प्रक्रिया में तेजी और सरकार को बचत

गोयल ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में जीईएम ने प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के साथ बेहतर मूल्य खोज सुनिश्चित की है। इससे खरीद प्रक्रिया में लगने वाला समय कम हुआ है और सरकार को बड़ी बचत हुई है। उन्होंने कहा कि एंड-टू-एंड डिजिटल खरीद प्रक्रिया ने सरकारी खरीद में जवाबदेही को भी मजबूत किया है।

एमएसएमई और महिला उद्यमियों को मिला बाजार

केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, जीईएम ने सरकारी खरीद के बाजार को एमएसएमई, स्टार्टअप्स, महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों, कारीगरों और बुनकरों के लिए अधिक सुलभ बनाया है। उन्होंने कहा कि यह प्लेटफॉर्म ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसे अभियानों को भी मजबूती दे रहा है।

Piyush Goyal News: 25 लाख विक्रेताओं से जुड़े सरकारी खरीदार

वर्ष 2016 में शुरू हुआ जीईएम अब अपने 11वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। वर्तमान में यह प्लेटफॉर्म 1.37 लाख से अधिक सरकारी खरीदार संगठनों को करीब 25 लाख विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं से जोड़ रहा है। आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, पोर्टल पर 10,660 से अधिक उत्पाद श्रेणियां और 350 सेवा श्रेणियां उपलब्ध हैं।

एआई से और स्मार्ट होगा जीईएम

सरकार के अनुसार, जीईएम अब केवल खरीद-बिक्री का मंच नहीं बल्कि भारत के डिजिटल प्रोक्योरमेंट इकोसिस्टम का महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है। आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और व्यापक भागीदारी के जरिए इसे और स्मार्ट एवं एकीकृत बनाने की योजना है। इससे सरकारी खरीद में पारदर्शिता, दक्षता और सुशासन को और मजबूत करने पर जोर रहेगा।

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