YOGI CABINET MEETING: उत्तर प्रदेश में मकान, दुकान, कार्यालय या गोदाम किराये पर लेने वालों के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने किरायेदारी से जुड़े शुल्क की व्यवस्था में बदलाव किया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 10 साल तक की अवधि वाले किरायानामा और पट्टा विलेखों के स्टांप शुल्क एवं पंजीकरण शुल्क की रियायती व्यवस्था को संशोधित करने का फैसला लिया गया। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से किरायानामा पंजीकृत कराना पहले के मुकाबले आसान और किफायती होगा।
सवाल-1: किरायेदारों के लिए नया नियम क्या है?
नई व्यवस्था में किरायानामा विलेख के शुल्क को पहले की तरह सर्किल रेट आधारित गणना से हटाकर निर्धारित श्रेणियों में सरल किया गया है। शुल्क अब औसत वार्षिक किराये और किरायेदारी की अवधि के आधार पर तय होगा।
प्रमुख दरें इस प्रकार हैं- ₹2 लाख तक सालाना किराया: 1 साल तक ₹1,000, 1 से 5 साल तक ₹2,000 और 5 से 10 साल तक ₹4,000। ₹6 लाख से अधिक और ₹10 लाख तक सालाना किराया: 1 साल तक ₹4,500, 1 से 5 साल तक ₹10,000 और 5 से 10 साल तक ₹13,000। इस बदलाव का मकसद किरायानामा पंजीकरण की फीस को अधिक स्पष्ट और पूर्व-निर्धारित बनाना है।
YOGI CABINET MEETING: सवाल-2: पहले किरायानामा महंगा क्यों पड़ता था?
सरकार के मुताबिक पहले मकान, दुकान या गोदाम किराये पर देने या लेने के दौरान स्टांप शुल्क की गणना सर्किल रेट के आधार पर होती थी। इसके कारण किरायानामा तैयार कराकर उसका पंजीकरण कराने में लोगों को अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़ सकता था। नई व्यवस्था में निर्धारित शुल्क लागू होने से मकान मालिक और किरायेदार को पहले से पता रहेगा कि किरायानामा पंजीकृत कराने में कितना शुल्क देना है।
सवाल-3: अगर सालाना किराया ₹10 लाख से ज्यादा है तो क्या होगा?
₹10 लाख से अधिक औसत वार्षिक किराये वाले मामलों के लिए भी शुल्क की गणना निर्धारित प्रावधानों के अनुसार होगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक ₹10 लाख तक की राशि पर निर्धारित रियायती शुल्क व्यवस्था लागू होगी, जबकि इसके ऊपर की राशि के लिए संबंधित नियमों के अनुसार शुल्क तय किया जाएगा। इसलिए अधिक किराये वाली संपत्ति के मामले में अंतिम शुल्क किराये की राशि, अवधि और दस्तावेज की प्रकृति के आधार पर निर्धारित होगा।
YOGI CABINET MEETING: सवाल-4: क्या यह नियम सिर्फ मकान किराये पर लेने वालों के लिए है?
नहीं। इसका दायरा केवल आवासीय मकानों तक सीमित नहीं है। मकान, दुकान, कार्यालय, गोदाम और अन्य किराये की संपत्तियों से जुड़े किरायानामा विलेख भी इसके दायरे में आते हैं। उत्तर प्रदेश में नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 के तहत किरायेदारी के पंजीकरण की व्यवस्था भी मौजूद है। ऐसे में नई शुल्क व्यवस्था किरायेदार और मकान मालिक दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।

सवाल-5: योगी सरकार ने यह बदलाव क्यों किया?
सरकार के मुताबिक इसके पीछे मुख्य उद्देश्य किरायानामा पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल और किफायती बनाना है। साथ ही सरकार चाहती है कि अधिक से अधिक मकान मालिक और किरायेदार अपनी किरायेदारी का औपचारिक दस्तावेज तैयार कराकर उसका पंजीकरण कराएं। पंजीकृत किरायानामा भविष्य में किराये से जुड़े विवादों की स्थिति में दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित हो सकता है।
YOGI CABINET MEETING: सवाल-6: इस फैसले का सबसे ज्यादा असर किस पर पड़ेगा?
इस फैसले का सीधा असर उत्तर प्रदेश में किराये की संपत्ति लेने और देने वालों पर पड़ेगा। खासकर छोटे मकान मालिक, किरायेदार, दुकानदार और छोटे कारोबारी नई निर्धारित शुल्क व्यवस्था से अपने पंजीकरण खर्च का पहले से अनुमान लगा सकेंगे। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि वास्तविक शुल्क किराये की राशि, किरायेदारी की अवधि और दस्तावेज की प्रकृति के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए किसी विशेष किरायानामे के लिए अंतिम शुल्क संबंधित पंजीकरण व्यवस्था के तहत ही तय होगा।
23 प्रस्तावों पर कैबिनेट की मुहर
किरायेदारी शुल्क में बदलाव के अलावा कैबिनेट बैठक में कुल 23 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें परिषदीय प्राथमिक स्कूलों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करना, खिलौना उद्योग को बढ़ावा देना, किसानों को आसान दर पर ऋण उपलब्ध कराना और चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे करीब 15.172 किलोमीटर लंबा होगा और इसके निर्माण पर एक हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च प्रस्तावित है। वहीं किसानों को यूपी सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड के माध्यम से 6 फीसदी की दर से छह लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराने का फैसला भी बैठक में शामिल रहा।
YOGI CABINET MEETING: अब किरायानामा बनवाने वालों को क्या समझना होगा?
योगी सरकार के फैसले का सीधा असर किरायानामा पंजीकरण की फीस पर पड़ेगा। अब शुल्क व्यवस्था को अधिक निर्धारित और सरल बनाने की कोशिश की गई है, जिससे मकान मालिक और किरायेदार दोनों को खर्च का अनुमान पहले से लगाने में आसानी होगी। खास तौर पर ₹10 लाख तक के औसत वार्षिक किराये वाले मामलों में नई रियायती दरें अहम हैं। हालांकि किसी खास संपत्ति के लिए कितना शुल्क देना होगा, यह किराये की राशि और किरायेदारी की अवधि के आधार पर ही तय होगा।
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