Rajasthan: राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव बहाली से जुड़े मामले में एकलपीठ द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों पर शुक्रवार को अंतरिम रोक लगा दी। एकलपीठ ने राज्य सरकार को हर साल छात्रसंघ चुनाव के लिए कैलेंडर जारी करने के निर्देश दिए थे, जिन्हें खंडपीठ ने फिलहाल लागू होने से रोक दिया है। खंडपीठ ने छात्र जयराव और अन्य पक्षकारों से जवाब भी तलब किया है।
खंडपीठ ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया
न्यायाधीश सुदेश बंसल और न्यायाधीश मनीष कुमार शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई की। महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने कोर्ट में बताया कि यह मामला मुख्य रूप से राजस्थान विश्वविद्यालय के सत्र 2025-26 के चुनाव आयोजित कराने से संबंधित था। उन्होंने कहा कि एकलपीठ ने मूल प्रार्थना से बाहर जाकर व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जो केवल जनहित याचिका के दायरे में आते हैं।
Rajasthan: एकलपीठ के दिशा-निर्देश और विवाद
एकलपीठ ने पहले राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को चुनाव संचालन के लिए एक समर्पित ‘चुनाव बोर्ड’ गठित करने का आदेश दिया था। साथ ही, हर शैक्षणिक सत्र के मार्च महीने में चुनाव कैलेंडर जारी करने और उसके सख्त पालन का निर्देश दिया गया था। इन निर्देशों में विश्वविद्यालय और राज्य चुनाव आयोग दोनों को शामिल किया गया था। महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि याचिका केवल विश्वविद्यालय के चुनाव बहाल करने तक सीमित थी, इसलिए दिशा-निर्देश का दायरा भी उसी तक होना चाहिए था।
छात्र संगठन और प्रशासन की प्रतिक्रिया
छात्र संगठन लगातार चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं और उनका कहना है कि चुनाव बहाल किए बिना शैक्षणिक लोकतंत्र प्रभावित होगा। दूसरी तरफ विश्वविद्यालय और सरकार प्रशासनिक पहलुओं पर विचार कर रहे हैं और दिशा-निर्देशों के कार्यान्वयन पर फिलहाल कोई कदम नहीं उठा रहे हैं।
Rajasthan: आगामी सुनवाई और प्रक्रिया
अब खंडपीठ ने छात्रों से जवाब तलब किया है और अगली सुनवाई में निर्णय लिया जाएगा कि एकलपीठ द्वारा जारी दिशा-निर्देशों पर रोक कब तक बनी रहेगी। इससे यह स्पष्ट होगा कि विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव की बहाली कब संभव हो पाएगी और प्रशासनिक प्रक्रिया में क्या बदलाव किए जाएंगे।
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