Adani Group: Gautam Adani के खिलाफ अमेरिका में चल रहा धोखाधड़ी का मामला जल्द खत्म हो सकता है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) अदाणी समूह के खिलाफ लगे आरोपों को वापस लेने की प्रक्रिया में है और इसी सप्ताह इसकी औपचारिक घोषणा हो सकती है।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) गौतम अदाणी और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज सिविल फ्रॉड केस को भी सुलझाने की तैयारी कर रहा है।
अदाणी ग्रुप शुरू से आरोपों से करता रहा इनकार
Adani Group लगातार अमेरिका में लगे आरोपों को खारिज करता रहा है। समूह का कहना था कि उसके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं और जांच एजेंसियों के पास ठोस सबूत नहीं हैं। माना जा रहा है कि यदि मामला समाप्त होता है तो अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजार अदाणी ग्रुप के लिए दोबारा पूरी तरह खुल सकते हैं, जिससे समूह को वैश्विक स्तर पर निवेश और विस्तार में मदद मिलेगी।
Adani Group: विशेषज्ञ बोले- कॉरपोरेट और राजनीतिक साजिश
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर संगीत रागी ने कहा कि अदाणी ग्रुप के खिलाफ मामला कॉरपोरेट प्रतिद्वंद्विता और राजनीतिक दबाव का परिणाम लगता है। उन्होंने कहा कि भारत में अदाणी समूह की बढ़ती कारोबारी ताकत कुछ लोगों को असहज कर रही थी। उनके मुताबिक भारत में कथित रिश्वत मामले को लेकर कोई ठोस जांच या प्रमाण सामने नहीं आया। रागी ने कहा कि अगर अमेरिकी एजेंसियों के पास सबूत होते तो वे अदालत में पेश करतीं। उन्होंने दावा किया कि अदाणी ग्रुप के खिलाफ केस कमजोर था और इसी वजह से अब उसे वापस लेने की नौबत आई है।
Adani Group: वरिष्ठ वकील बोले- आरोपों में दम नहीं था
क्रॉफर्ड बेली एंड कंपनी के पार्टनर और वरिष्ठ वकील संजय अशर ने कहा कि अमेरिकी एजेंसियों के आरोपों का कोई मजबूत आधार नहीं था। उन्होंने कहा कि अगर आरोप गंभीर होते तो SEC और DOJ समझौते या सेटलमेंट की तरफ नहीं जाते। इससे साफ संकेत मिलता है कि जांच एजेंसियों को अपने दावों पर भरोसा नहीं था।
भारत पर दबाव बनाने की कोशिश का दावा
CIPP के CEO यतीश रजावत ने इस मामले को भारत पर दबाव बनाने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि जिस समय यह मुकदमा दर्ज हुआ, उसी दौरान भारत और अमेरिका के बीच बड़े व्यापारिक समझौतों और टैरिफ को लेकर बातचीत चल रही थी। रजावत के मुताबिक अमेरिका भारत पर दबाव बनाना चाहता था, लेकिन इसका असर न तो भारत सरकार पर पड़ा और न ही अदाणी समूह पर।
अंतरराष्ट्रीय बाजार पर रहेगा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिकी एजेंसियां औपचारिक रूप से केस वापस लेती हैं तो इससे अदाणी समूह की वैश्विक साख को मजबूती मिलेगी। साथ ही विदेशी निवेशकों का भरोसा भी बढ़ सकता है।
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