West Bengal: भाजपा से विधायक रथिंद्र बोस शुक्रवार को निर्विरोध पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष निर्वाचित हुए। उत्तर बंगाल से इस पद को संभालने वाले वह पहले विधायक बन गए हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े और पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट रथिंद्र बोस लंबे समय से उत्तर बंगाल की राजनीति में सक्रिय हैं। उनके निर्विरोध चुनाव को भाजपा द्वारा उस क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ का रणनीतिक संकेत माना जा रहा है।
विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए निर्विरोध चयन
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बोस के नाम का प्रस्ताव सदन में रखा। प्रोटेम स्पीकर तापस रॉय ने ध्वनि मत से मतदान कर उन्हें अध्यक्ष घोषित किया। विधानसभा में भाजपा के 207 विधायकों ने उनका समर्थन किया। विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस ने अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार नहीं उतारा, जिससे बोस का निर्विरोध चयन सुनिश्चित हुआ। इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष पद पर वरिष्ठ वकील या कानूनी पृष्ठभूमि वाले विधायक आते रहे हैं, लेकिन बोस इस परंपरा को तोड़ते हुए चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में इस पद पर पहुंचे हैं।
West Bengal: शुभेंदु अधिकारी ने इस्तीफा सौंपा
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम विधानसभा सीट से इस्तीफा देकर भवानीपुर से विधायक बने रहने का विकल्प चुना। विधानसभा नियमों के तहत उन्होंने अपने इस्तीफे की प्रति रथिंद्र बोस को सौंप दी। हाल में हुए विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम से पबित्र कर को 9,665 मतों से हराया, जबकि भवानीपुर में ममता बनर्जी को 15,105 मतों के अंतर से हराया।
राजनीतिक और क्षेत्रीय महत्व
बोस के अध्यक्ष चुने जाने से उत्तर बंगाल का राजनीतिक महत्व बढ़ गया है। यह भाजपा की रणनीतिक सुदृढ़ीकरण का संकेत भी माना जा रहा है। विपक्ष के नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने नए अध्यक्ष का स्वागत किया, लेकिन विधानसभा में हालिया हिंसा के मुद्दे को भी उठाया। इससे पहले वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने भी इस पद पर कार्य किया है। बोस का चयन विधानसभा में राजनीतिक स्थिरता और पार्टी के बहुमत के तहत औपचारिक प्रक्रिया बन गया है।
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