Sheopur Incident: नेशनल हाईवे-552 पर सोईकलां के पास लावारिस मिली ढाई साल की बच्ची का मामला अब बड़े मानव तस्करी नेटवर्क से जुड़ गया है। पुलिस ने अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें इंदौर की ब्यूटी पार्लर संचालिका, उसका पति और अन्य महिलाएं शामिल हैं।
पुलिस जांच में सामने आया है कि बच्ची को कानूनी प्रक्रिया से गोद नहीं लिया गया था, बल्कि करीब 1 लाख रुपए में खरीदा गया था। इसके बाद उसे राजगढ़ के कारोबारी दंपती को सौंपा गया।
अंधविश्वास में छोड़ी बच्ची
जांच में यह भी सामने आया है कि दंपती बच्ची को अशुभ मानने लगा था। उन्हें लग रहा था कि बच्ची के घर आने के बाद उनका कारोबार घाटे में जा रहा है। इसी अंधविश्वास के चलते उन्होंने बच्ची को हाईवे पर छोड़ दिया।
पुलिस ने कारोबारी आकाश मूंदड़ा और उनकी पत्नी कृतिका मूंदड़ा को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में दोनों ने अपना अपराध कबूल किया है।
नवजात से शुरू हुआ सौदा
पुलिस के अनुसार, बच्ची का सौदा 21 नवंबर 2024 को किया गया था, जब वह सिर्फ 6 दिन की नवजात थी। उसे धार जिले की एक क्लीनिक संचालिका के जरिए खरीदा गया, जिसने उसे खरगोन की महिला से लेने की बात कही। इसके बाद बच्ची कई हाथों से होते हुए इंदौर पहुंची, जहां से उसे दंपती को बेच दिया गया।
35 घंटे में कार्रवाई, 3 जिलों में दबिश
मामला सामने आने के बाद पुलिस ने तीन विशेष टीमें बनाकर इंदौर, धार और खरगोन में दबिश दी। करीब 35 घंटे के ऑपरेशन में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
असल माता-पिता का सुराग नहीं
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि बच्ची के असली माता-पिता कौन हैं। पुलिस अभी तक इस कड़ी तक नहीं पहुंच सकी है और मामले की जांच जारी है।
कैसे सामने आया मामला
18 अप्रैल को बच्ची श्योपुर के टोंक-चिरगांव हाईवे पर लावारिस हालत में मिली थी। पुलिस ने उसे सुरक्षित रखकर बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया और बाद में वन स्टॉप सेंटर भेजा गया।
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