Tamilnadu politics: तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। AIADMK के तीन बागी विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है, जिसे विधानसभा स्पीकर प्रभाकर ने मंजूर भी कर लिया है। इसके बाद राज्य में अब कुल 4 विधानसभा सीटें खाली हो चुकी हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ये नेता जल्द ही विजय की पार्टी TVK का दामन थाम सकते हैं। मदुरानंदगम से विधायक मरगदम कुमरवेल, पेरुन्दूरई से विधायक जयकुमार और दारापुरम की विधायक सत्यभामा ने अपने पद से इस्तीफा दिया है। इनमें दो महिला विधायक भी शामिल हैं। माना जा रहा है कि आने वाले उपचुनाव में ये तीनों नेता TVK के टिकट पर मैदान में उतर सकते हैं। इससे पहले विजय एक सीट छोड़ चुके हैं क्योंकि उन्होंने दो विधानसभा सीटों से जीत हासिल की थी।
फ्लोर टेस्ट में भी किया था TVK का समर्थन
ये तीनों विधायक उन 25 AIADMK विधायकों में शामिल थे जिन्होंने विधानसभा के फ्लोर टेस्ट के दौरान विजय की सरकार के समर्थन में वोट किया था। इस्तीफे से पहले इन नेताओं ने मंत्री आधव अर्जुन से भी मुलाकात की थी, जिसके बाद राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं।
Tamilnadu politics: AIADMK में नेतृत्व को लेकर बढ़ा विवाद
AIADMK के भीतर लंबे समय से असंतोष चल रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता एसपी वेलुमणि और सी वी शनमुगम खुलकर एडप्पाडी पलानीस्वामी के नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं। दोनों नेताओं की मांग है कि पलानीस्वामी महासचिव पद छोड़ें ताकि पार्टी में नए नेतृत्व को मौका मिल सके। दरअसल, 2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में AIADMK को बड़ी हार का सामना करना पड़ा था। 234 सीटों वाली विधानसभा में पार्टी सिर्फ 47 सीटें ही जीत सकी, जिसके बाद अंदरूनी कलह लगातार बढ़ती जा रही है।
विजय की सरकार होगी और मजबूत?
Tamilnadu politics: 2026 के विधानसभा चुनाव में विजय की TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। पार्टी ने 108 सीटें जीतीं, लेकिन स्पष्ट बहुमत से दूर रह गई। विजय ने खुद दो सीटों से चुनाव जीता था, इसलिए एक सीट छोड़ने के बाद उनकी पार्टी के पास 107 विधायक रह गए। इसके बाद कांग्रेस, VCK, IUML, CPI और CPI(M) समेत सहयोगी दलों के समर्थन से विजय ने सरकार बनाई। फिलहाल उनके पास 120 विधायकों का समर्थन है। वहीं फ्लोर टेस्ट में AIADMK के 25 विधायकों ने भी सरकार के पक्ष में वोट किया था। अब अगर बागी विधायक आधिकारिक तौर पर TVK में शामिल होकर उपचुनाव जीत जाते हैं, तो विजय की सरकार पहले से ज्यादा मजबूत हो सकती है। इससे गठबंधन सहयोगियों पर उनकी निर्भरता भी कम हो जाएगी।
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