UP News :उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों के चुनाव को लेकर बीजेपी ने अपने सभी पत्ते खोल दिए हैं। पार्टी ने 11 सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है।खास बात यह है कि बीजेपी ने पांच सीटों पर ब्राह्मण चेहरों को मौका दिया है। इसके अलावा OBC, राजपूत और वैश्य समाज को भी प्रतिनिधित्व मिला है। ऐसे में अब चर्चा सिर्फ उम्मीदवारों की नहीं है। टिकट वितरण के सामाजिक समीकरण पर भी नजर है।

छह और नामों के साथ तस्वीर साफ
बीजेपी ने 29 सितंबर को छह और उम्मीदवारों के नाम घोषित किए। वाराणसी स्नातक सीट से केदारनाथ सिंह को टिकट मिला है। मेरठ स्नातक सीट से दिनेश गोयल मैदान में हैं। वहीं, इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट से अशोक कुमार राठौर को प्रत्याशी बनाया गया है।
शिक्षक सीटों पर भी पार्टी ने तीन नाम घोषित किए हैं। वाराणसी से डॉ. प्रमोद मिश्रा को टिकट मिला है। आगरा से इंजीनियर हरिकिशोर तिवारी मैदान में हैं। वहीं, गोरखपुर-फैजाबाद से ध्रुव कुमार त्रिपाठी को मौका दिया गया है।
दिनेश गोयल मौजूदा MLC हैं। पार्टी ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया है। वहीं, केदारनाथ सिंह पहले भी MLC रह चुके हैं। दूसरी ओर, हरिकिशोर तिवारी को पहली बार मौका मिला है।
इससे पहले बीजेपी पांच उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुकी थी। इनमें लखनऊ स्नातक सीट से इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह शामिल हैं। आगरा स्नातक से डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह को टिकट दिया गया है।
इसके अलावा बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट से डॉ. हरि सिंह ढिल्लो, लखनऊ शिक्षक से उमेश द्विवेदी और मेरठ शिक्षक से श्रीचंद्र शर्मा को प्रत्याशी बनाया गया है। यानी अब सभी 11 सीटों पर बीजेपी की पूरी सूची सामने आ गई है।
UP News :पांच ब्राह्मण चेहरों पर क्यों टिकी नजर?
इन चुनावों में बीजेपी के पांच ब्राह्मण उम्मीदवारों की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पार्टी ने 11 सीटों में पांच ब्राह्मण, तीन OBC, दो राजपूत और एक वैश्य उम्मीदवार को मैदान में उतारा है।
इसी वजह से टिकट वितरण को सामाजिक समीकरण के नजरिए से भी देखा जा रहा है। हालांकि, उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पहचान और स्थानीय पकड़ भी इन चुनावों में महत्वपूर्ण हो सकती है।
मीडिया रिपोर्टों में इस चुनाव को UGC से जुड़े मुद्दों की राजनीतिक पृष्ठभूमि से भी जोड़कर देखा गया है। शिक्षक और स्नातक मतदाता वर्ग उच्च शिक्षा और विश्वविद्यालयों से सीधे जुड़ा है। इसलिए UGC से जुड़े सवालों की चर्चा इस वर्ग में भी हो रही है।
हालांकि, रिपोर्टों के मुताबिक बीजेपी अपने टिकट वितरण को UGC मुद्दे की सीधी प्रतिक्रिया नहीं मान रही है।
सिर्फ जातीय समीकरण नहीं, चेहरे भी अहम
बीजेपी के उम्मीदवार चयन में सिर्फ सामाजिक प्रतिनिधित्व ही नजर नहीं आता। पार्टी ने ऐसे चेहरों को भी जगह दी है, जिनका संबंधित मतदाता वर्ग में संपर्क रहा है।
उदाहरण के तौर पर प्रमोद मिश्रा और ध्रुव त्रिपाठी शिक्षक संगठनों से जुड़े रहे हैं। वहीं, कुछ अन्य उम्मीदवार पहले से राजनीतिक और संगठनात्मक भूमिका में सक्रिय रहे हैं।
इसलिए इस चुनाव को सिर्फ टिकटों की लड़ाई के तौर पर देखना आसान नहीं है। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों का अपना अलग मतदाता वर्ग है। यहां स्थानीय संगठन, व्यक्तिगत पहचान और पुराने नेटवर्क भी भूमिका निभाते हैं।
2027 से पहले बढ़ी सियासी हलचल
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले होने वाला यह MLC चुनाव भी चर्चा में है। इसके जरिए राजनीतिक दल शिक्षक, स्नातक और पेशेवर वर्ग के बीच अपनी संगठनात्मक पकड़ को परख सकते हैं।
बीजेपी के लिए उम्मीदवारों की घोषणा के बाद अब फोकस संगठन और जमीनी संपर्क पर रहेगा। इसके अलावा उम्मीदवारों के अभियान और स्थानीय मुद्दे भी अहम होंगे।
चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक 11 सीटों के लिए 23 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा। वहीं, 27 अक्टूबर को मतगणना की जाएगी। नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है। नाम वापसी की आखिरी तारीख 9 अक्टूबर तय है।
मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 6 दिसंबर को समाप्त हो रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में चुनावी गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि बीजेपी के पांच ब्राह्मण चेहरों वाला यह सामाजिक समीकरण चुनाव में किस तरह सामने आता है। साथ ही शिक्षक और स्नातक वर्ग के स्थानीय मुद्दे भी तस्वीर को प्रभावित कर सकते हैं।
ये भी पढ़ें…PM मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत, व्यापार-रक्षा समेत इन मुद्दों पर चर्चा









