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बरेली में 320 करोड़ का वक्फ घोटाला, योगी सरकार को 100 पन्नों के दस्तावेज सौंप मौलाना शहाबुद्दीन ने की जांच की मांग

मौलाना शहाबुद्दीन

UP News: ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने वक्फ संपत्तियों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए बरेली जिला प्रशासन को 50 पन्नों के दस्तावेज सौंपे हैं। उनका दावा है कि इन दस्तावेजों में वक्फ की करोड़ों रुपये मूल्य की जमीनों के कथित घोटाले से जुड़े सबूत शामिल हैं। इससे पहले भी वह इस मुद्दे को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिख चुके हैं।

DM कार्यालय पहुंचकर सौंपे दस्तावेज

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी मंगलवार को बरेली के जिला अधिकारी कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने प्रशासन को दस्तावेज सौंपे। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं की ओर से उनसे वक्फ संपत्तियों में कथित घोटाले के सबूत मांगे जा रहे थे। इसी के चलते उन्होंने संबंधित दस्तावेज प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत किए हैं। मौलाना के मुताबिक, दस्तावेजों में बरेली जिले की दो अलग-अलग वक्फ संपत्तियों का उल्लेख किया गया है। पहला मामला बहेड़ी तहसील के गांव जाम सावंत का बताया गया है। उनका आरोप है कि यहां करीब 1400 बीघा वक्फ भूमि में अनियमितताएं हुई हैं।

उन्होंने दावा किया कि इस जमीन का बाजार मूल्य लगभग 220 करोड़ रुपये है और इसका एक हिस्सा बेचा जा चुका है, जबकि शेष जमीन को बेचने की तैयारी की जा रही है। दूसरा मामला सदर तहसील के गांव चंद्रपुर बिजपुरी का बताया गया है। मौलाना का दावा है कि शहरी क्षेत्र में शामिल हो चुकी इस जमीन की मौजूदा कीमत करीब 100 करोड़ रुपये है और इसे भी कथित तौर पर बेच दिया गया है।

UP News: 320 करोड़ का वक्फ घोटाला होने का दावा

पत्रकारों से बातचीत में मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने दावा किया कि केवल बरेली जिले में ही करीब 320 करोड़ रुपये की वक्फ संपत्तियों में घोटाला हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ बोर्ड से जुड़े कुछ जिम्मेदार लोगों और कथित भू-माफियाओं की मिलीभगत से करोड़ों रुपये की जमीनें औने-पौने दामों पर बेच दी गईं। उन्होंने कहा कि वक्फ की संपत्तियां समाजसेवा, धार्मिक कार्यों और जरूरतमंद लोगों की मदद के उद्देश्य से दान की गई थीं, लेकिन इनका इस्तेमाल मूल उद्देश्य के अनुरूप नहीं हुआ।

अखिलेश यादव पर भी साधा निशाना

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव राम मंदिर में कथित चढ़ावे से जुड़े मुद्दों पर लगातार सवाल उठाते हैं, लेकिन वक्फ संपत्तियों में कथित अनियमितताओं पर चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने कहा कि जब उनसे वक्फ घोटाले के सबूत मांगे गए तो उन्होंने प्रशासन के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत कर दिए। मौलाना ने आरोप लगाया कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो बड़े स्तर पर अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।

फिलहाल, जिला प्रशासन की ओर से मौलाना द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों या उनके आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। साथ ही, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। यदि मामले में जांच शुरू होती है या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया जाता है, तो खबर को अपडेट किया जाएगा।

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