UPI Payment Charge: यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) से होने वाले भुगतान पर भविष्य में शुल्क (चार्ज) लगाने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। गुरुवार को लोकसभा ने टैक्स संबंधी नियमों में संशोधन वाला बिल पारित कर दिया। हालांकि, बिल में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किस प्रकार के यूपीआई ट्रांजेक्शन या कितनी राशि से अधिक के भुगतान पर शुल्क लगेगा। इस पर अंतिम फैसला भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) करेंगे।
UPI Payment Charge: पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांजेक्शन पर नहीं लगेगा शुल्क-
सूत्रों के अनुसार, दो व्यक्तियों के बीच होने वाले यूपीआई ट्रांजेक्शन (Person-to-Person) पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। शुल्क केवल पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) या मर्चेंट-टू-मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर लागू हो सकता है।
UPI Payment Charge: 2000 रुपये से अधिक के भुगतान पर लग सकता है चार्ज-
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष में पर्सन-टू-मर्चेंट ट्रांजेक्शन में केवल 4 प्रतिशत भुगतान ही 2,000 रुपये से अधिक के थे। सूत्रों का कहना है कि 2,000 रुपये से ऊपर के यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इसकी दर और अंतिम नियम अभी तय नहीं किए गए हैं।
71% यूपीआई ट्रांजेक्शन रहेंगे शुल्क मुक्त-
वित्त वर्ष 2025-26 में यूपीआई के जरिए 24,161.69 करोड़ ट्रांजेक्शन हुए, जिनकी कुल राशि 314 लाख करोड़ रुपये रही। इनमें 71 प्रतिशत राशि पर्सन-टू-पर्सन ट्रांजेक्शन की थी, जिन्हें शुल्क से मुक्त रखने की बात कही जा रही है। वहीं 29 प्रतिशत राशि पर्सन-टू-मर्चेंट ट्रांजेक्शन की रही।
छोटे भुगतान पर नहीं पड़ेगा असर-
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पर्सन-टू-मर्चेंट ट्रांजेक्शन में 59 प्रतिशत भुगतान 0 से 500 रुपये के बीच थे। ऐसे में माना जा रहा है कि छोटे और रोजमर्रा के यूपीआई भुगतान पर किसी तरह का असर नहीं पड़ेगा।
बिल में क्या है-
संशोधित बिल के जरिए पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट, 2007 में बदलाव किया जा रहा है। मौजूदा नियमों के तहत बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान यूपीआई ट्रांजेक्शन पर शुल्क नहीं लगा सकते। संशोधन के बाद आवश्यकता पड़ने पर शुल्क लगाने का कानूनी रास्ता उपलब्ध होगा।
बैंकों को क्यों चाहिए शुल्क-
जानकारों के अनुसार, यूपीआई सेवा के संचालन पर बैंकों का सालाना करीब 10 हजार करोड़ रुपये खर्च होता है। देश में 700 से अधिक बैंक और वित्तीय संस्थान यूपीआई सेवाएं दे रहे हैं। शुल्क लागू होने पर बैंकों को यूपीआई नेटवर्क मजबूत करने और साइबर सुरक्षा पर अधिक निवेश करने में मदद मिल सकती है।
अभी क्या है स्थिति-
फिलहाल यूपीआई ट्रांजेक्शन पर किसी भी तरह का नया शुल्क लागू नहीं हुआ है। लोकसभा से बिल पास होने के बाद अब RBI और NPCI तय करेंगे कि किन ट्रांजेक्शन पर, कब से और कितनी दर से शुल्क लगाया जाएगा। तब तक आम यूपीआई उपयोगकर्ताओं के लिए मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं है।
यह भी पढ़े- आपके दांतों को खराब कर सकते हैं रोजमर्रा के ये 10 फूड्स, डॉक्टर से जानें होने वाले नुकसान








