Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासन को सोमवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी को झकझोर दिया। 69 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर राजधानी लखनऊ की सड़कों पर रेंगते हुए बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास की ओर बढ़े। भीषण गर्मी, तपती सड़क और बदन पर पड़ती चिलचिलाती धूप के बीच यह प्रदर्शन केवल विरोध नहीं था, बल्कि छह साल से न्याय की आस लगाए बैठे युवाओं की बेबसी का दर्द था।
सड़क पर रेंगते हुए सरकार तक पहुंचाने की कोशिश
हाथों और घुटनों के बल सड़क पर रेंगते अभ्यर्थियों का कहना था कि उनकी हालत अब कीड़े-मकोड़ों से भी बदतर हो चुकी है। यही वजह है कि उन्होंने अपना दर्द दिखाने के लिए यह अनोखा और मार्मिक तरीका चुना।एक अभ्यर्थी ने कहा,हमारी जिंदगी ठहर गई है। छह साल से आंदोलन कर रहे हैं। अब हमारी हालत कीड़े-मकोड़ों से भी खराब हो गई है, इसलिए हम रेंगते हुए अपनी बात कहने आए हैं।”
बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव करने निकले थे बड़ी संख्या में अभ्यर्थी लखनऊ में बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव करने के लिए निकले थे। हालांकि पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। इसके बावजूद अभ्यर्थी सड़क पर बैठकर और रेंगकर अपना विरोध दर्ज कराते रहे। उनका आरोप है कि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही और भर्ती प्रक्रिया को लेकर लगातार लापरवाही बरती जा रही है।
Uttar Pradesh: 31 मई की सुनवाई से पहले बढ़ा दबाव
69 हजार शिक्षक भर्ती मामले की अगली सुनवाई 31 मई को होनी है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यह तारीख बेहद अहम है, लेकिन सरकार और संबंधित विभाग अदालत में मजबूती से अपना पक्ष नहीं रख रहे हैं।अभ्यर्थियों ने मांग की कि सरकार इस मामले में प्रभावी पैरवी करे ताकि लंबे समय से अटकी भर्ती प्रक्रिया का रास्ता साफ हो सके। हमारे पास अब कोई दूसरा रास्ता नहीं हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि हमारी हालत देखी जाए। छह साल से संघर्ष कर रहे हैं। गर्मी, सर्दी, बारिश… अब कुछ फर्क नहीं पड़ता। हमारे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।यह बयान उन हजारों युवाओं की पीड़ा को बयां करता है, जिनका करियर और भविष्य इस भर्ती पर टिका हुआ है।
Uttar Pradesh: छह साल से अधर में लटका भविष्य
69 हजार शिक्षक भर्ती विवाद ने हजारों अभ्यर्थियों की जिंदगी रोक दी है। कई उम्मीदवार उम्र सीमा के करीब पहुंच चुके हैं, कई आर्थिक संकट झेल रहे हैं और कई मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं।
उनका कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो उनके सपने हमेशा के लिए टूट सकते हैं।सरकार पर बढ़ता दबाव तपती सड़क पर रेंगते अभ्यर्थियों की तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इन तस्वीरों ने सरकार और प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है।अब सबकी नजर 31 मई की सुनवाई पर टिकी है। अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि इस बार अदालत और सरकार दोनों उनकी आवाज सुनेंगे।
न्याय की आस में संघर्ष जारी
69 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का यह प्रदर्शन केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि उस पीढ़ी की पुकार है जो वर्षों से मेहनत, धैर्य और उम्मीद के सहारे अपने भविष्य का इंतजार कर रही है।
तपती सड़क पर रेंगते इन युवाओं ने साफ संदेश दिया है नौकरी हमारी मेहनत का हक है, और इसे लेकर रहेंगे।








