VANDE MATRAM CONTROSERSAY: हैदराबाद से सांसद और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने ने वंदे मातरम को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि संसद सभी धार्मिक समूहों के लोगों का मिलन स्थल है, इसलिए वहां वंदे मातरम गाना उचित नहीं हो सकता। ओवैसी ने कहा कि भारत किसी एक धर्म, देवी या देवता के नाम पर नहीं चलता और संविधान सभी धर्मों को समान सम्मान देता है।
‘वंदे मातरम देवी की स्तुति’
ओवैसी ने कहा कि वंदे मातरम एक देवी की स्तुति है और इसे राष्ट्रगान के बराबर नहीं माना जा सकता। उन्होंने संविधान सभा की बहस का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी कुछ सदस्यों ने प्रस्तावना की शुरुआत देवी के नाम से करने की बात कही थी, लेकिन भारत को एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में स्थापित किया गया। उन्होंने कहा कि इस देश की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि यहां आस्था रखने वालों के साथ-साथ नास्तिकों का भी सम्मान किया जाता है।
VANDE MATRAM CONTROSERSAY: बीजेपी ने किया तीखा पलटवार
ओवैसी के बयान पर भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताई है। भाजपा महासचिव तरुण चुग ने कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन की पहचान रहा है। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई के दौरान यह गीत अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक बना था। तरुण चुग ने कहा कि वंदे मातरम का विरोध करने वाले लोग “बौद्धिक रूप से बेईमान” हैं और इस गीत का सम्मान करना हर भारतीय के लिए गर्व की बात होनी चाहिए।
बयान के बाद फिर गरमाई राजनीति
ओवैसी के इस बयान के बाद देशभर में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एक तरफ AIMIM इसे संविधान और धर्मनिरपेक्षता से जोड़कर देख रही है, वहीं भाजपा इसे राष्ट्रभक्ति और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से जोड़ रही है।








