VB-G RAM G Fraud: गांवों में रोजगार उपलब्ध कराने वाली नई व्यवस्था वीबी-जी राम जी में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए अब तकनीक की मदद ली जा रही है। सरकार ने मजदूरों की पहचान और विकास कार्यों की निगरानी के लिए डिजिटल सिस्टम के साथ-साथ इसरो की तकनीकी क्षमता का इस्तेमाल शुरू किया है। अब सिर्फ मस्टर रोल में दर्ज मजदूरों की संख्या के आधार पर काम की निगरानी नहीं होगी। यह भी जांच की जाएगी कि काम पर पहुंचने वाला मजदूर वही है या उसकी जगह कोई दूसरा व्यक्ति काम कर रहा है। इसके साथ ही जिस काम के नाम पर पैसा खर्च किया जा रहा है, वह वास्तव में जमीन पर हुआ है या नहीं, इसकी भी निगरानी की जा रही है।
VB-G RAM G Fraud: मजदूरों की पहचान के लिए फेस ऑथेंटिकेशन-
फर्जी हाजिरी रोकने के लिए मजदूरों की पहचान में फेस ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल किया जा रहा है। मौके पर ही फोटो के जरिए मजदूर की हाजिरी दर्ज की जाती है। इससे किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर हाजिरी लगाने की संभावना कम हो जाती है। हालांकि, तकनीकी कारणों से अगर किसी वास्तविक मजदूर की हाजिरी दर्ज नहीं हो पाती है तो उसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी रखी गई है।
VB-G RAM G Fraud: इसरो का NRSC कर रहा काम की निगरानी-
विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति की निगरानी में इसरो का नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) मदद कर रहा है। इसके तहत उपग्रह से मिलने वाली तस्वीरों और आंकड़ों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसरो के भुवन प्लेटफॉर्म पर नक्शे और उपग्रह आधारित जानकारी उपलब्ध है। जुलाई से इसी प्लेटफॉर्म पर ‘भूग्राम’ नाम की ऑनलाइन व्यवस्था भी शुरू की गई है। इसमें तालाब, सड़क और दूसरी निर्मित परिसंपत्तियों के साथ चल रहे कार्यों की जानकारी नक्शे पर अपलोड की जाती है। इससे अधिकारियों को जमीन पर काम की स्थिति समझने में मदद मिलती है।
उपग्रह डेटा से तय हो रही विकास कार्यों की जरूरत-
पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की योजना बनाने में भी इसरो के ‘युक्तधारा’ प्लेटफॉर्म की मदद ली जा रही है। इसके जरिए यह तय करने में सहायता मिलती है कि किसी क्षेत्र में किस तरह के काम की जरूरत है। अब तक युक्तधारा के माध्यम से 26.97 लाख कार्यों की योजना बनाई जा चुकी है। इनमें से 6.03 लाख काम वीबी-जी राम जी के तहत लिए गए हैं, जबकि 2.27 लाख काम फिलहाल चल रहे हैं।
एक ही जगह बार-बार काम दिखाकर नहीं कर सकेंगे फर्जीवाड़ा-
युक्तधारा का एक अहम फायदा यह है कि किसी एक स्थान पर पहले से किए गए काम की जानकारी रिकॉर्ड में मौजूद रहती है। अगर किसी गांव में पहले से तालाब या सड़क बनी हुई है तो उसकी जानकारी नक्शे पर उपलब्ध रहेगी। ऐसे में नया काम तय करते समय अधिकारी पहले से मौजूद रिकॉर्ड देख सकते हैं। इससे एक ही काम को अलग-अलग योजनाओं में दोबारा दिखाकर पैसा निकालने की संभावना काफी कम हो जाती है।
GIS और MIS से हर काम की ऑनलाइन निगरानी-
सरकार ने विकास कार्यों की निगरानी के लिए GIS (Geographic Information System), MIS (Management Information System) और दूसरे डिजिटल सिस्टम को भी जोड़ा है। इन प्रणालियों के जरिए यह जानकारी हासिल की जा सकती है कि काम किस जगह हो रहा है, उसकी कितनी प्रगति हुई है और वहां वास्तव में क्या परिसंपत्ति बनाई गई है।इस पूरी व्यवस्था से मजदूरों की हाजिरी और जमीन पर हुए काम, दोनों स्तरों पर निगरानी मजबूत हो रही है। सरकार का मानना है कि फेस ऑथेंटिकेशन, जियो-टैगिंग, उपग्रह डेटा और डिजिटल रिकॉर्ड के इस्तेमाल से योजना में होने वाले फर्जीवाड़े पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकेगी।
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