Women’s Reservation Bill: नई दिल्ली में लोकसभा के विशेष सत्र के दौरान केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने परिसीमन बिल, 2026 पेश किया। इस बिल का उद्देश्य लोकसभा और विधानसभा सीटों का पुनर्निर्धारण करना, राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के लिए सीटों की संख्या तय करना और नए चुनावी क्षेत्र बनाना है।
विपक्ष का जोरदार विरोध
बिल पेश होते ही विपक्ष ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया। कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने इसे संविधान की भावना के खिलाफ बताया, जिसके बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया। समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेन्द्र यादव ने कहा कि परिसीमन को जनगणना से अलग करना गलत है और इससे संवैधानिक ढांचा प्रभावित हो सकता है।
Women’s Reservation Bill: सपा और कांग्रेस की आपत्ति
धर्मेंद्र यादव ने मांग की कि सरकार इस संविधान संशोधन और परिसीमन बिल को वापस ले। वहीं अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण बिल का समर्थन करते हुए सरकार से सवाल किया कि इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है और जनगणना में देरी क्यों हो रही है।
अमित शाह का जवाब
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उन्होंने धर्मेंद्र यादव के बयान पर तंज कसते हुए कहा कि अभी घरों की गिनती हो रही है, उनकी जाति नहीं, और अगर समाजवादी पार्टी को मौका मिले तो वह “घरों की भी जाति तय कर दे।”
Women’s Reservation Bill: आरक्षण पर भी तकरार
मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण देने की मांग पर अमित शाह ने कहा कि संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण का प्रावधान नहीं है। इसके जवाब में अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि क्या मुस्लिम महिलाएं देश की आधी आबादी का हिस्सा नहीं हैं। शाह ने पलटवार करते हुए कहा कि सपा चाहे तो अपने टिकट मुस्लिम महिलाओं को दे सकती है।
आगे क्या?
परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों पर संसद में बहस तेज हो गई है। जहां विपक्ष इसे संघीय ढांचे और संविधान के खिलाफ बता रहा है, वहीं सरकार इसे लोकतांत्रिक सुधार का कदम मान रही है। आने वाले दिनों में इस पर और तीखी राजनीतिक टकराव की संभावना है।
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